Dainik Navajyoti Logo
Thursday 22nd of April 2021
 
स्वास्थ्य

नई तकनीकों से कार्डियक सर्जरी और आसान, नई जनरेशन के स्टेंट्स से एंजियोप्लास्टी का बदल रहा ट्रेंड

Wednesday, March 17, 2021 10:25 AM
कॉन्सेप्ट फोटो।

जयपुर। नई जांच तकनीकों और एंजियोप्लास्टी में काम आने वाले नई जनरेशन के स्टेंट्स से एंजियोप्लास्टी का ट्रेंड बदल रहा है और जटिल केस भी आसानी से हो रहे हैं। शहर के सीनियर कार्डियोलोजिस्ट डॉ. जितेंद्र मक्कड़ ने बताया कि इंट्रावस्कुलर अल्ट्रासाउंड (आइवीस) तकनीक से आर्टरी की सिकुड़न, ब्लॉकेज की लंबाई और कठोरता, आर्टरी में जमे कैल्शियम के बारे में पता चलता है। यही नहीं मरीज की स्टेंटिंग के बाद उसका इंप्लांटेशन सही हुआ है या नहीं, यह भी जाना जा सकता है।

ओसीटी बताएगी, स्टेंट सही काम कर रहा या नहीं
डॉ. मक्कड़ ने बताया कि ऑप्टीकल कोहैरेंस टोमोग्राफी (ओसीटी) ऑप्टीकल इमेजिंग तकनीक है जो इंफ्रारेड लाइट का इस्तेमाल कर रक्त वाहिकाओं के अंदर का दृश्य देखने और प्लाक के प्रकार व फैलाव को जानने में मदद करता है। साथ ही इससे स्टेंट के साइज, फैलाव और उसके सही खुलने की सही रिपोर्ट भी देता है।

रोटा तकनीक, स्कोरिंग बैलून व शॉक वेव लिथोट्रिप्सी
इन तकनीकों से कठोर से कठोर कैल्शियम वाले ब्लॉकेज में भी स्टेंट लगाया जा सकता है। इंट्रा वैस्कुलर अल्ट्रासाउंड एवं ओसीटी से यह जानने में मदद मिलती है कि इनमें से कौन सी तकनीक इस्तेमाल की जाए।

भारतीय बायोरिसोर्बेबल स्टेंट भी चलन में
डॉ. मक्कड़ के अनुसार एंजियोप्लास्टी के काफी समय बाद मरीज को उसी आर्टरी में फिर से ब्लॉकेज हो जाए तो ऐसी स्थिति में पीएलएल से बने बायोरिसोर्बेबल स्टेंट के इस्तेमाल का प्रचलन बढ़ने लगा है। ये स्टेंट आर्टरी में इंप्लांट होने के एक से डेढ़ साल बाद शरीर में ही घुल जाएगा और आर्टरी को वापस उसकी शेप में ले आएगा।

ड्रग एलुटिंग बैलून
कुछ विशेष परिस्थितियों में स्टेंट का उपयोग न हो पाए या स्टेंट के अंदर ब्लॉक आ जाए, वहां ड्रग एलुटिंग बैलून का प्रयोग काफी प्रभावी रहता है।

डिस्टल रेडियल एंजियोप्लास्टी
कार्डियक इंटरवेंशन में अब एक्सपर्ट दाएं हाथ के अंगूठे के पीछे की बड़ी नस से भी कैथेटर का इस्तेमाल कर हार्ट तक अपनी पहुंच सुगम बना रहे हैं। इस जगह से होने वाले प्रोसीजर को डिस्टल रेडियल एंजियोप्लास्टी कहते हैं। इसमें आर्टरी के नुकसान होने से लेकर प्रोसीजर में लगने वाला समय भी कम होता है।

यह भी पढ़ें:

17 वर्षीय हार्ट रिसिपिएंट अस्पताल से डिस्चार्ज, कुछ दिनों तक रहेगा चिकित्सकों की निगरानी में

प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल से 17 वर्षीय हार्ट रिसिपिएंट को डिस्चार्ज कर दिया गया। वह अब पूरी तरह से स्वस्थ्य है और अपने रोजमर्रा के जरूरी काम करने में सक्षम है। लेकिन उअस्पताल प्रशासन की ओर से उसे एतिहात के लिए बनीपार्क जयसिंह हाइवे स्थित माधव आश्रम में रखा गया।

07/02/2020

स्तन हटाए बिना लेजर से कैंसर का कारगर इलाज

देश में महिलाओं की मौत के सबसे बड़े कारण स्तन कैंसर से जंग में लेजर तकनीक काफी कारगर सिद्ध हो रही है। कैंसर सर्जरी के कुल मामलों में 80 प्रतिशत मुख तथा स्तन कैंसर के हैं ऐसे में इस नई तकनीक को सभी के लिए सुलभ बनाने की सख्त जरूरत है।

22/11/2019

एंडगेम ऑफ टबैको विषय पर वेबीनार में जुटे हेल्थ एक्सपर्ट, बचाव के संभावित तरीकों पर की चर्चा

पूर्णिमा यूनिवर्सिटी तथा जोधपुर स्कूल ऑफ पब्लिक हैल्थ की ओर से 'एंडगेम ऑफ टबैको: प्रोटेक्टिंग नेक्स्ट जनरेशन' विषय पर इंटरनेशनल वेबीनार आयोजित किया गया। इसमें देश-विदेश के हैल्थ एक्सपर्ट्स व एजुकेशनिस्ट्स ने युवा पीढ़ी को टबैको से बचाव के संभावित तरीकों के बारे में गंभीर चर्चा की।

07/06/2020

वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, खोजा ऐसा वायरस जो हर तरह के कैंसर का करेगा खात्मा

दुनियाभर के साथ ही भारत में भी कैंसर की बीमारी तेजी से फैल रही है। इस खतरनाक बीमारी की वजह से हर साल करीब 8 लाख लोगों की मौत हो जाती है। ऐसे में वैज्ञानिकों ने एक ऐसा वायरस खोजा है जो हर तरह के कैंसर को खत्म कर सकता है।

11/11/2019

एंकालूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस से पीड़ित मरीज की हिप जॉइंट सर्जरी, 3डी प्रिंटिंग तकनीक से राजस्थान में पहले ऑपरेशन का दावा

राजधानी के एचसीजी अस्पताल में 20 साल से एंकालूजिंग स्पॉन्डिलाइटिस बीमारी से पीड़ित मरीज की सफल सर्जरी की गई। इस बीमारी में कूल्हे के जोड़ के एक जगह जड़ हो गए। डॉक्टर्स ने इस जटिल केस को 3डी प्रिंटिंग तकनीक की सहायता से सफलतापूर्वक ठीक कर दिया। दावा है कि राजस्थान में इस तरह की सर्जरी का यह पहला मामला है।

03/12/2019

जिम में ट्रेनर की न करें अनदेखी

हर व्यक्ति,खासकर युवा पीढ़ी जिम में जाकर एक्सरसाइज के माध्यम से अपने शरीर को मजबूत बनाना चाहता है।

26/02/2020

उत्तर भारत में पहली बार कैडवरिक गुर्दा प्रत्यारोपण, SMS अस्पताल में हुआ सफल लीवर और किडनी ट्रांसप्लांट

एसएमएस अस्पताल के चिकित्सकों ने एक बार फिर अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में कीर्तिमान स्थापित किया है। यहां चिकित्सकों ने पहली बार स्वयं के स्तर पर लीवर का ट्रांसप्लांट किया है। इस सफलता पर चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने भी उत्तर भारत में पहली बार सफलतापूर्वक कैडवरिक गुर्दा प्रत्यारोपण करने पर एसएमएस प्रबंधन एवं डॉक्टर्स की टीम को बधाई दी है।

13/11/2020