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स्वास्थ्य

क्रिटीकल केयर वेंटीलेशन वर्कशॉप संपन्न, वेंटीलेटर पर बदलेगा सांस लेने का पैटर्न, बचेगी जान

Monday, November 18, 2019 11:55 AM
वर्कशॉप में जानकारी देते हुए एक्सपर्ट।

जयपुर। निमोनिया, डेंगू, स्वाइन फ्लू के गंभीर मरीजों में कई बार ऑक्सीजन की कमी होने से मल्टी ऑर्गन फेलियर से मरीज की मौत हो जाती है। इस स्थिति से मरीज को बचाने के लिए अब वेंटीलेटर में एडवांस मोड शामिल किए गए हैं, जिससे मरीज के सांस लेने के पैटर्न को बदल दिया जाता है और उसकी जान बच जाती है। रविवार को खासाकोठी सर्किल स्थित एक होटल में संपन्न हुई दो दिवसीय इंटरनेशनल क्रिटीकल केयर वेंटीलेशन वर्कशॉप में विशेषज्ञों ने गंभीर मरीजों को बचाने की नई तकनीकों पर चर्चा की।

एकेडमी ऑफ क्लीनिकल एजुकेशन और इंडियन सोसायटी ऑफ क्रिटीकल केयर मेडिसिन की ओर से आयोजित इस वर्कशॉप के समापन पर आयोजन सचिव डॉ. पंकज आनंद ने बताया कि वर्कशॉप के अंत में एक टेस्ट भी हुआ जिसमें एक्सपर्ट्स ने सिम्यूलेटर पर अलग-अलग मेडिकल कंडीशन बनाई और स्टूडेंट्स ने उसे बचाने का प्रयास किया।

एपीआरवी मोड से बदलेगा पैटर्न
वर्कशॉप में डॉ. आनंद व डॉ. संबित साहू बताया कि आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीज को कई बार एडल्ट रेसपेरेट्री डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) हो जाता है। इस स्थिति में वेंटीलेटर लगने के बाद भी उसके फेफड़ों में सांस नहीं जा पाती और ऑक्सीजन की कमी के कारण खतरा बन जाता है। इससे मरीज को बचाने के लिए वेंटीलेटर में एडवांस मोड एपीआरवी आ गया है। इसकी सहायता से मरीज के सांस लेने के पैटर्न में बदलाव कर दिया जाता है, जिससे ऑक्सीजन की मात्रा फिर से ठीक हो जाती है। दिल्ली के डॉ. नितिन जैन ने बताया कि वेंटीलेटर से सांस न आने पर अब प्रोनिंग तकनीक से मरीज को सांस दी जाती है। यह काफी सस्ती तकनीक है और मौजूदा संसाधनों से ही डॉक्टर का उद्देश्य पूरा हो जाता है।

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