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स्वास्थ्य

डेंगू होने से फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया, वेंटीलेटर भी फेल, डॉक्टर्स ने बचाया

Friday, October 18, 2019 14:00 PM
दुर्लभजी अस्पताल में भर्ती बच्चा व साथ में परिजन

जयपुर। डेंगू के गंभीर स्थिति में हो जाने के बाद प्रिंस के फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया था। कृत्रिम सांस देने के लिए लगाया गया वेंटीलेटर भी फेल हो गया था। ऐसे में डॉक्टरों ने उसे एक्मो तकनीक से कृत्रिम फेफड़ों की मदद से लगातार प्रयास से बचा लिया गया।

संतोकबा दुर्लभजी हॉस्पिटल में डॉक्टर्स ने नवीनतम तकनीक से अति गंभीर स्थिति में मरीज को बचाया। डॉक्टर्स ने दावा किया है कि एक्मो तकनीक से बच्चे को डेंगू की गंभीर स्थिति से बचाने का प्रदेश में पहला और देश में दूसरा मामला है। संतोकबा दुर्लभजी ट्रस्ट के सचिव योगेंद्र दुर्लभजी ने बताया कि मरीज के परिजनों की आर्थिक स्थिति देखते हुए उन्हें इलाज के किए 2 लाख रुपए की राहत दी, जिससे परिजनों को इलाज के खर्च को लेकर किसी भी प्रकार की परेशानी न हो।

20 हजार तक आ गई थी प्लेटलेट्स
दुर्लभजी हॉस्पिटल के बाल रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजीव बंसल ने बताया कि प्रिंस को गंभीर डेंगू के चलते सवाई माधोपुर से यहां रैफर किया गया था। उसे एक हफ्ते से बुखारए पेट दर्द, उल्टी, शरीर में सूजन और सांस में तेजी की समस्या हो रही थी। उसकी डेंगू एनएस-1 जांच पॉजिटिव आई और प्लेटलेट्स भी 20 हजार तक आ गई, जिससे उसके फेफड़ों में निमोनिया हो गया। जब प्रिंस की और जांचे की गई, तो पता चला कि उसके दोनों फेफड़ों में हवा अंदर नहीं जा रही थी, जिससे उसके शरीर में ऑक्सीजन की कमी होने लग गई थी।

स्थिति इतनी गंभीर कि वेंटीलेटर भी फेल
अस्पताल के पीडियाट्रिक इनटेन्सिविस्ट डॉ. रवि शर्मा ने बताया कि जब मरीज के फेफड़ों ने काम करना बंद कर दिया तो उसे नाक के माध्यम से नॉन इनवेंसिव वेंटीलेटर लगया गया। लेकिन मशीन की पूरी क्षमता के बाद भी उसकी श्वास की 94 प्रतिशत जरूरत ही पूरी हो रही थी। वेंटीलेटर फेल होने के बाद उसे वीवी एक्मो पर ले जाने का प्रयास किया जाने लगा।

तकनीक के इस्तेमाल में था बेहद जोखिम
सीटीवीएस एक्सपर्ट डॉ. नीरज शर्मा ने बताया कि डेंगू के मरीज को कहीं से भी रक्तस्त्राव होने का खतरा होता है। ऐसे में वीवी एक्मो तकनीक में इस्तेमाल किये जाने वाले कैथेटर लगाने से प्रिंस को आंतरिक रक्तस्त्राव होने का बहुत खतरा था लेकिन प्रिंस के केस में ऐसा नहीं हुआ। छह दिन तक वीवी एक्मो तकनीक पर निर्भर रहने के बाद जब डॉक्टर्स ने उसके फेफड़ों को फिर से काम करने की स्थिति में पाया तो कृत्रिम श्वास प्रणाली हटा ली गई और अब प्रिंस बिल्कुल स्वस्थ है। डेंगू से गंभीर पीडि़त किसी बच्चे को वीवी एक्मो तकनीक द्वारा बचाए जाने काए यह प्रदेश में पहला मामला है।

क्या है एक्मो तकनीक
विनो वीनस एक्मो तकनीक कृत्रिम फेफड़ों की तरह काम करती है। इसमें मरीज की नसों से खून खींचकर उसे मशीन द्वारा ऑक्सीफाई किया जाता है और फिर से नसों में डाला जाता है। इससे मरीज के शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बनी रहती है। देश मे पीडियाट्रिक एक्मो तकनीक की सुविधा बहुत ही कम अस्पतालों में मौजूद है, उनमें से दुर्लभजी हॉस्पिटल एक है।
 

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