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स्वास्थ्य

युवाओं और महिलाओं में बढ़ रहे हार्ट फेलियर के मामले, 50 साल से कम उम्र के लोग ज्यादा प्रभावित

Friday, February 14, 2020 09:35 AM
सांकेतिक तस्वीर।

जयपुर। जयपुर में एक चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। दरअसल 50 साल से कम आयु वर्ग के मरीजों में हार्ट फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि आमतौर पर 60 से 65 वर्ष की आयु के लोगों में हार्ट फेलियर होता है। निष्क्रिय और सुस्त जीवन शैली, लगातार बढ़ता तनाव, नमक और चीनी ज्यादा खाना, सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला भोजन और वायु प्रदूषण कुछ ऐसे कारक हैं, जिससे युवा आबादी को ज्यादा खतरा हो रहा है। हार्ट फेलियर सभी दिल की बीमारियों में मरीज की मौत होने और बार-बार अस्पताल में भर्ती होने का प्रमुख कारण है। भारत में हार्ट फेलियर के मरीजों की औसत उम्र 59 वर्ष है। वैसे यहां इसकी चपेट में मरीज पश्चिमी देशों के मुकाबले 10 साल पहले आ जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार उनके पास महीने में आने वाले 50 फीसदी से ज्यादा मरीज हार्ट फेलियर से पीड़ित होते हैं।

विशेषज्ञों की राय
जयपुर के एसएमएस हॉस्पिटल में कार्डियोलॉजी विभाग के हेड डॉ. एसएम शर्मा ने बताया कि आमतौर पर पुरुषों में 55 साल की उम्र से पहले और महिलाओं में 65 साल की आयु से पहले होने वाली दिल की किसी भी बीमारी को समय से पहले होना माना जाता है। देशभर में हार्ट फेलियर के मामले बढ़ रहे हैं, लेकिन जयपुर में युवाओं और महिलाओं में हार्ट फेलियर तेजी से बढ़ रहा है। इसका बड़ा कारण एक्सरसाइज ना करना, अनुचित खानपान और तनाव भरा जीवन।

फोर्टिस अस्पताल में इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. संजीब रॉय ने कहा कि हार्ट फेलियर का जोखिम बढ़ाने वाले कारकों और इसके लक्षणों के प्रति जागरुकता लाने की आवश्यकता है। इसके अलावा इस रोग से पीड़ित मरीज को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना चाहिए। इसके अलावा दवाओं को समय पर लेना चाहिए।

हार्ट फेलियर क्या है
हार्ट फेलियर में दिल की मांसपेशियां समय के साथ-साथ सख्त होती जाती हैं। इससे दिल रक्त का संचार ठीक तरह से नहीं कर पाता है। इससे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक काफी सीमित मात्रा में ऑक्सीजन और दूसरे पोषक तत्व पहुंचते हैं। हार्ट फेलियर के ज्यादातर मरीजों की जांच अचानक तब होती है, जब वह पहली बार अस्पताल में भर्ती होते हैं।

क्या हैं लक्षण
हार्ट फेलियर के सामान्य लक्षणों में सांस लेने में परेशानी होना, टखनों, पैरों या पेट पर सूजन आना, अच्छी तरह सांस लेने के लिए ऊंचे तकिए की जरूरत पड़ना और रोजमर्रा के काम करते समय बिना किसी कारण के थकान महसूस करना शामिल है। लक्षण दिखने पर मरीज को समय से अपनी जांच करानी चाहिए और लाइफस्टाइल में तुरंत बदलाव करना चाहिए।

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