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स्वास्थ्य

SMS अस्पताल के चिकित्सकों ने किया कमाल, हार्ट का ऑपरेशन कर जन्मजात विकृति की दूर

Tuesday, November 17, 2020 13:30 PM
कॉन्सेप्ट फोटो।

जयपुर। प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल के कार्डियो थोरेसिक विभाग ने एक जटिल ऑपरेशन कर 19 वर्षीय किशोरी के हृदय की जन्मजात विकृति को दूर करने में सफलता हासिल की है। इसमें चिकित्सकों ने यह ऑपरेशन बिना छाती की हड्डी कांटे एक छोटा सा चीरा लगाकर अंजाम दिया है। कार्डियोथोरेसिक विभाग की इस उपलब्धि पर अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सकों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। इससे पहले यहीं पर उत्तर भारत का सबसे पहला हृदय प्रत्यारोपण भी किया गया था।

कार्डियोथोरेसिक विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल शर्मा ने बताया कि मरीज ममता पुत्री जोगाराम (आयु 19 वर्ष, निवासी-दाबली सारा छावा, बाड़मेर) को जन्म से ही सांस फूलने, छाती में दर्द व अत्यधिक थकान की शिकायत थी। वह अपनी दिनचर्या का कोई भी काम ठीक से नहीं कर पाती थी। मरीज की जांच करने पर पाया गया कि मरीज को एवी कैनाल डिफेक्ट विद वेंट्रिकूलर सेप्टल डिफेक्ट विद सिवियर माईट्रल एण्ड ट्राईकस्पिड लीक विद पल्मोनरी आर्टिरियल हाईपरटेंशन की बीमारी थी, जो की लगभग 1000 में से मात्र 1 या उससे भी कम लोगो में होती है, जो वयस्कों में भी पाई जा सकती है।

ममता के मिट्रल वाल्व की कोर्डे और ट्राईकस्पिड वाल्व की कोर्ड आपस में उलझी हुई थी, जिसे रिपेयर कर पाना काफी मुश्किल था। उसका ऑपरेशन ऑपरेशन छाती की हड्डी काट कर ही किया जा सकता था और ऐसा ऑपरेशन बिना छाती की हड्डी काटे भी संभव नहीं है। मरीज की उम्र 19 वर्षीय एवं लड़की होने की वजह से सामने दिखते हुए चीरे की वजह से उसकी शादी में अड़चन ना आए, ऐसे में चिकित्सकों ने करीब 3 घंटे तक विचार कर इस ऑपरेशन को बिना छाती की हड्डी काटे तथा बिना जांघ पर चीरा लगाए पूरा करने की योजना बनाई। चिकित्सकों ने पूरी योजना के बाद यह ऑपरेशन करीब 9 सेंटीमीटर का छाती पर चीरा लगाकर अंजाम दिया है।

इस ऑपरेशन में मरीज के एक 1 सेमी बड़ा वेन्टीकूलर सेप्टल डिफेक्ट रिपेयर किया गया। इसकी माईट्रल वाल्व लीफलेट 5-0 प्रोरोलीन से रिपेयर की गई, साथ ही ट्राईकस्पिट वाल्व की लीफलेट पेच से रिपेयर की गई। इस तरह का ऑपरेशन एशिया में संभवतः पहली बार बिना छाती की हड्डी काटे एसएमएस के डॉक्टर्स की टीम ने किया है। इस ऑपरेशन की सफलता में डॉ. अनिल शर्मा के साथ डॉ. सुनील दीक्षित, डॉ. मोहित शर्मा, डॉ के. के. मावर, डॉ. ध्रुव, डॉ. प्रमोद, डॉ. जमना राम, डॉ. राजेंद्र सर्जन रहे एवं एनेस्थीसिया में डॉ. रीमा एवं डॉ. इंदु रहे।

बता दें कि अभी तक ह्रदय के जो मिनिमल इनवेसिव ऑपरेशन होते है उनमे छाती पर चार अलग-अलग छोटे चीरे लगाए जाते है ताकि उपकरण आसानी से छाती में प्रवेश कर सके एवं उसके अलावा एक चीरा जांघ में लगाया जाता है जिसके द्वारा जांघ की फेमोरल धमनी एवं शिरा (आर्टरी एवं वेन) के द्वारा रक्त संचार प्रणाली को ऑपरेशन के दौरान नियंत्रित किया जा सके। इस प्रकार की सर्जरी के लिए विशिष्ट प्रकार का ऑपरेशन थिएटर, विशेष ट्रेंड स्टाफ एवं उपकरणों की आवश्यकता होती है। डॉ. शर्मा और उनकी टीम द्वारा बिना छाती की हड्डी काटे एक ही चीरे द्वारा जन्मजात विकृति की यह सफल सर्जरी एसएमएस अस्पताल की ऐतिहासिक उपलब्धि है।

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