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स्वास्थ्य

इस खास तकनीक से बिना सीना चीरे बदला हार्ट वाल्व

Thursday, November 07, 2019 18:30 PM
प्रेस कांफ्रेंस में जानकारी देते महात्मा गांधी अस्पताल के डॉक्टरों की टीम

जयपुर। कभी बुजुर्गों की मानी जाने वाले हृदय की बीमारियां अब युवा पीढ़ी को भी अपनी चपेट में ले रही हैं। यह समाज के लिए बड़ी चुनौती है, लेकिन इस बीच सुखद पहलू यह है कि इन बीमारियों के आधुनिकतम उपचार व व उपचार तकनीक रोगियों को राहत दे रही है।

हाल ही में महात्मा गांधी अस्पताल की कार्डियक साइंसेज टीम ने ट्रांसकैथेटर एओर्टिक रिप्लेसमेंट 'टीएवीआर'  जैसी नई तकनीक के जरिये एक व्यक्ति को नया जीवन दिया है। उपचार के बाद रोगी अब सामान्य होकर स्वास्थ लाभ ले रहा है। महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज के चेयरपर्सन डॉ. विकास स्वर्णकार ने बताया कि हार्ट के एओर्टिक वाल्व को बदलने की यह तकनीक देश के मात्र 7 केंद्रों पर ही उपलब्ध है। खास बात यह है कि उच्च गुणवत्ता वाला एफडीए अप्रूव्ड वाल्व काम में लिया गया है। 

हाल ही में विशेष प्रशिक्षण के लिए अस्पताल की टीम अमेरिका के प्रतिष्ठित मेयो क्लीनिक में गई थी। खास बात यह है कि उपचार का खर्चा भी अन्य संस्थानों के मुकाबले 40% तक कम रहा है। डीएवीआर को सफलता का अंजाम देने वाले वरिष्ठ चिकित्सक हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर दीपेश अग्रवाल ने बताया कि 65 वर्षीय शांतिलाल सीने में दर्द सांस की तकलीफ तकलीफ को लेकर महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचे थे, शांतिलाल के हृदय की गति बढ़ी हुई थी व कार्यक्षमता 15% तक रह गई थी। इसी वजह से ऑपरेशन संभव नहीं था। रोगी का एओर्टिक वाल्व सिकुड़ा हुआ था। आन्द्रूने दबाव के चलते ह्रदय का आकार बढ़ गया था। यह हार्ट फेलियर की स्थिति होती है। रोगी की जीवन आशा बहुत ही कम रह गई थी।

डॉक्टर दीपेश अग्रवाल ने बताया कि सामान्य हार्ट वाल्व को इंटरवेंशनल प्रक्रिया के जरिए भी बदला जा सकता है। खासकर यह तकनीक उन रोगियों के लिए  उपयुक्त होती है जो हार्ट फेलियर की स्थिति में हो व जिनके ह्रदय की कार्य क्षमता कम रह गई हो। जांघ की फिमोरल आर्टरी के जरिये वायर के साथ सेल्फ एक्सपेंडिबल एओर्टिक वाल्व को हार्ट तक ले जाकर स्थापित कर दिया गया  इसके साथ ही एओर्टिक वाल्व के पत्ते सामान्य रूप से ह्रदय से शरीर में खून के प्रवाह समय पर स्वतः ही खुलने व बन्द होने लगे।

वरिष्ठ हार्ट सर्जन डॉ बुद्धादित्य चक्रवर्ती ने बताया कि एओर्टिक वाल्व को बिना चीरे के बदलना एक जटिल प्रक्रिया है। ऐसे में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए हार्ट सर्जन, एनस्थीसिया विशेषज्ञ व हाई ब्रीड कैथलैब की आवश्यकता होती है। टीएवीआर प्रोसीजर टीम में डर दीपेश अग्रवाल, डॉ. हर्षवर्धन, डॉ. बुधादित्य चक्रवर्ती, डॉ. रामानंद सिन्हा व डॉं गौरव गोयल आदि  सहयोगी रहे।

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