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स्वास्थ्य

अचानक बढ़ जाती है दिल की धड़कन तो हो सकता है आईएसटी, जानें डॉक्टर की राय

Wednesday, December 25, 2019 17:55 PM
डॉ. राहुल सिंघल

जयपुर। दिल का लगातार धडक़ते रहना हमारी जिंदगी के लिए बहुत जरूरी है। कई बार कुछ शारीरिक परेशानियों की वजह से दिल की धड़कन घटती-बढ़ती रहती है। दिल की धड़कन के घटने या बढ़ने से कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो सकती हैं। ये स्थिति दिल के साथ-साथ शरीर के अन्य महत्वपूर्ण अंगों जैसे फेफड़े, लीवर, किडनी और दिमाग को भी नुकसान पहुंचा सकती है। ऐसी ही एक बीमारी इनएप्रोप्रीऐट साइनस टेककार्डिया (आईएसटी) है।


क्या है आईएसटी
हार्ट एंड जनरल हॉस्पिटल (टोंगिया) के सीनियर कार्डियक इलेक्ट्रोफिजियोलॉजिस्ट डॉ. राहुल सिंघल ने बताया कि टेककार्डिया, शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया का हिस्सा हो सकता है। इस बीमारी में हृदय की सामान्य धडक़न 100 से 110 के बीच होती है और जरा सी शारीरिक गतिविधियां करने पर तुरंत ही 130 से 140 तक चली जाती है। साथ ही कई चिकित्सीय कारणों के चलते भी टेककार्डिया की समस्या हो जाती है जैसे थायराइड, हाइपरथाइराइडिज्म आदि। कई बार व्यक्ति में निमोनिया होने के कारण वह सांस लेने में असमर्थ हो जाता है जिससे टेककार्डिया की शिकायत हो सकती है।


24 घंटे मॉनिटरिंग कर होती है पहचान
अभी तक आईएसटी के सही कारणों का पता नहीं चल पाया है। इसमें हार्ट रेट बिना किसी खास वजह के सामान्य से तेज हो जाती हैं और हार्ट रेट 100 बीट प्रति मिनट और इससे ऊपर तक पहुंच जाती है। यदि किसी में आईएसटी के लक्षणों में से कोई लक्षण पाया जाता है तो 24 घंटे तक मॉनीटरिंग करके इसकी पहचान की जा सकती है। आइएसटी के मरीजों की सामान्यतया प्रति दिन की हार्ट रेट 100 बीट प्रति मिनट से भी अधिक होती है। जब इस तरह के मरीज बिस्तर पर लेट जाते हैं तो इन्हें अपनी हार्ट रेट नार्मल लगती है। आइएसटी के मरीज को कई बार सोने के दौरान अपनी कम हार्ट बीट महसूस होती है। जबकि देखा जाता है कि उसकी हार्टबीट 130 तक होती है।


दवाईयों से हो सकता है ‌‌‌‌‌‌‌इलाज
डॉ. राहुल सिंघल बताते हैं कि, आइएसटी के रोगी को शारीरिक श्रम से परहेज करना चाहिए। यह लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्या है और इसका उपचार भी लंबे समय तक चलता है। आइएसटी का उपचार दवाईयों या ओपन हार्ट सर्जरी से किया जाता है। हालांकि ओपन हार्ट सर्जरी की कम ही जरूरत पड़ती है। इसके मरीजों का उपचार चिकित्सक अधिकतर दवाईयों द्वारा ही करते हैं। यदि आपको इनमें से आईएसटी का कोई भी लक्षण अपने शरीर में लगता है तो 24 घंटे तक अपने शरीर की मॉनीटरिंग करें। इसके बाद तुरंत चिकित्सक से परामर्श करें। इसे दवाओं से नियंत्रित करने का प्रयास किया जाता है और समस्या ज्यादा होने पर रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन द्वारा इसका इलाज किया जाता है।


आईएसटी के लक्षण
- धकधकी (दिल का तेजी के साथ धडक़ना) की समस्या
- रोगी के सीने में दर्द और गर्दन में स्पन्दन
- थकावट और पसीने आने के लक्षण
- मरीज को हृदय गति तेज महसूस होना
- हाइपरथाइराइडिज्म, वजन में कमी होना, बुखार का बने रहना

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