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स्वास्थ्य

देश का पहला मामला: 9 साल के बच्चे में कोरोना के लक्षण नहीं, 10 बार रिपोर्ट आई पॉजिटिव

Thursday, June 04, 2020 13:25 PM
सांकेतिक तस्वीर।

जयपुर। एक ओर जहां सर्दी, जुकाम, बुखार जैसे लक्षणों को आमतौर पर कोरोना का संकेत माना जा रहा है, लेकिन इस बीच जेकेलोन अस्पताल में एक ऐसा केस भी सामने आया, जिसमें एक 9 साल के बच्चे को कोई लक्षण नहीं थे। बावजूद इसके उसकी कुल 10 रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ चुकी है। हालांकि अस्पताल के चिकित्सकों के कमाल के चलते 28 और 30 मई को बच्चे की दोनों रिपोर्ट लगातार नेगेटिव आने पर उसे 1 जून को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। बच्चा अब ठीक है, अपने भरतपुर स्थित घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहा है।

ऐसे हुई पॉजिटिव आने की शुरुआत
बालक न तो बीमार था और न ही उसमें कोई लक्षण थे। उसके घर के आसपास के ज्यादातर घरों में लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे ऐसे में चिकित्सा विभाग ने बच्चे और उसके परिवार के भी सैंपल लिए जो कि पॉजिटिव आए। इसके बाद बच्चे को 14 अप्रैल को भरतपुर के अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन वहां बच्चा करीब 1 महीने रहा और इस दौरान 8 कोरोना टेस्ट में से 7 टेस्ट पॉजिटिव आए। हालांकि इस दौरान 8 मई को बच्चे की एक रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद भी पॉजिटिव आने और बच्चे में कोई लक्षण नहीं होने पर 13 मई को उसे जयपुर के जेकेलोन अस्पताल में रैफर किया गया, यहां भी एसएमएस मेडिकल कॉलेज में उसके 6 टेस्ट कराए गए। इनमें से 24 मई को पहला टेस्ट नेगेटिव रहा, लेकिन फिर बाकी सभी रिपोर्ट पॉजिटिव रही। चिकित्सकों ने बेहतर इलाज से बच्चे की 28 और 30 मई को दोनों रिपोर्ट नेगेटिव आई।

जेकेलोन के चिकित्सकों ने की स्टडी तो चला पता
जेकेलोन अस्पताल के सीनियर प्रोफेसर और नोडल ऑफिसर कोरोना डॉ. आरके गुप्ता और शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एमएल गुप्ता ने बच्चे के बिना लक्षणों के बावजूद पॉजिटिव आने को गंभीरता से लेते इसकी स्टडी की। स्टडी के दौरान बच्चे की कई जांचें की गई जिसमें पाया कि बच्चे का विटामिन डी और सी लेवल बेहद कम है। इसके साथ ही उसका एफडीपी टेस्ट कराया जो कि लगातार पॉजिटिव आ रहा था, इससे यह पता चला कि बच्चे के रक्त में संक्रमण या कुछ खराबी है। बच्चे का डी-डायमर टेस्ट भी पॉजिटिव आ रहा था। इसके अलावा खून के बहाव को रोकने के लिए पीटी टेस्ट कराया गया जो भी बढ़ा हुआ आया। इन सभी जांचों से यह पता चला कि बच्चे के रक्त में इंफेक्शन या खराबी थी और रक्त में आयरन की भी बेहद कमी थी। बच्चे का इम्यून पॉवर तो बहुत ही कम था। यही वजह रही कि बच्चा बिना लक्षणों के होने के बावजूद भी पॉजिटिव आ रहा था। जांचों में कमी पता चलने के बाद बच्चे का 24 मई से उसकी कमजोरी के आधार पर 2 एंट्री वायरल ड्रग के कॉम्बिनेशन से इलाज शुरू किया गया, जिसके बाद बच्चा स्वस्थ हुआ और 28 और 30 मई को उसकी दोनों कोरोना जांचे लगातार नेगेटिव आई, जिसके बाद बच्चे को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

वायरस की स्टडी के लिए भेजा गया है पुणे
जेकेलोन के चिकित्सकों ने SMS मेडिकल कॉलेज के 5 अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञों से राय ली। विशेषज्ञों ने सैंपलों की जांच जयपुर के अलावा महाराष्ट्र के पुणे में भी कराने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों में शामिल बाल रोग, मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और चेस्ट विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने इस केस की समरी तैयार कर चर्चा करने की बात कही। इसके अलावा पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से भी बात करके पता लगाया जाएगा कि इस बालक में आखिर ऐसा कौन सा प्रकृति का वायरस है, जो उसे नेगेटिव नहीं होने में देरी का कारण रहा। इसके अलावा विशेषज्ञ बालक की इम्यूनिटी की जांच भी कराएंगे। फिलहाल रिपोर्ट के आने का इंतजारर है।

जेकेलोन अस्पताल के सीनियर प्रोफेसर और नोडल ऑफिसर कोरोना डॉ. आरके. गुप्ता ने कहा कि यह प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का पहला मामला है। अमूमन देखा गया है कि अधिकतम 28 दिन तक ही वायरस रहता है। केस की गंभीरता को देखते हुए इस पर शोध किया गया जिसमें पाया गया कि बच्चे के रक्त में खराबी थी और उसमें पोषक तत्वों की कमी के चलते इम्यून पॉवर भी कम था। जांच कराने के बाद बच्चे की असल बीमारी पकड़ में आई और फिर उसी दिशा में उसका बेहतर इलाज कर उसे कोरोना मुक्त किया गया।

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