Dainik Navajyoti Logo
Sunday 16th of May 2021
 
स्वास्थ्य

देश का पहला मामला: 9 साल के बच्चे में कोरोना के लक्षण नहीं, 10 बार रिपोर्ट आई पॉजिटिव

Thursday, June 04, 2020 13:25 PM
सांकेतिक तस्वीर।

जयपुर। एक ओर जहां सर्दी, जुकाम, बुखार जैसे लक्षणों को आमतौर पर कोरोना का संकेत माना जा रहा है, लेकिन इस बीच जेकेलोन अस्पताल में एक ऐसा केस भी सामने आया, जिसमें एक 9 साल के बच्चे को कोई लक्षण नहीं थे। बावजूद इसके उसकी कुल 10 रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आ चुकी है। हालांकि अस्पताल के चिकित्सकों के कमाल के चलते 28 और 30 मई को बच्चे की दोनों रिपोर्ट लगातार नेगेटिव आने पर उसे 1 जून को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। बच्चा अब ठीक है, अपने भरतपुर स्थित घर पर स्वास्थ्य लाभ ले रहा है।

ऐसे हुई पॉजिटिव आने की शुरुआत
बालक न तो बीमार था और न ही उसमें कोई लक्षण थे। उसके घर के आसपास के ज्यादातर घरों में लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए थे ऐसे में चिकित्सा विभाग ने बच्चे और उसके परिवार के भी सैंपल लिए जो कि पॉजिटिव आए। इसके बाद बच्चे को 14 अप्रैल को भरतपुर के अस्पताल में भर्ती किया गया, लेकिन वहां बच्चा करीब 1 महीने रहा और इस दौरान 8 कोरोना टेस्ट में से 7 टेस्ट पॉजिटिव आए। हालांकि इस दौरान 8 मई को बच्चे की एक रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बाद भी पॉजिटिव आने और बच्चे में कोई लक्षण नहीं होने पर 13 मई को उसे जयपुर के जेकेलोन अस्पताल में रैफर किया गया, यहां भी एसएमएस मेडिकल कॉलेज में उसके 6 टेस्ट कराए गए। इनमें से 24 मई को पहला टेस्ट नेगेटिव रहा, लेकिन फिर बाकी सभी रिपोर्ट पॉजिटिव रही। चिकित्सकों ने बेहतर इलाज से बच्चे की 28 और 30 मई को दोनों रिपोर्ट नेगेटिव आई।

जेकेलोन के चिकित्सकों ने की स्टडी तो चला पता
जेकेलोन अस्पताल के सीनियर प्रोफेसर और नोडल ऑफिसर कोरोना डॉ. आरके गुप्ता और शिशु रोग विभागाध्यक्ष डॉ. एमएल गुप्ता ने बच्चे के बिना लक्षणों के बावजूद पॉजिटिव आने को गंभीरता से लेते इसकी स्टडी की। स्टडी के दौरान बच्चे की कई जांचें की गई जिसमें पाया कि बच्चे का विटामिन डी और सी लेवल बेहद कम है। इसके साथ ही उसका एफडीपी टेस्ट कराया जो कि लगातार पॉजिटिव आ रहा था, इससे यह पता चला कि बच्चे के रक्त में संक्रमण या कुछ खराबी है। बच्चे का डी-डायमर टेस्ट भी पॉजिटिव आ रहा था। इसके अलावा खून के बहाव को रोकने के लिए पीटी टेस्ट कराया गया जो भी बढ़ा हुआ आया। इन सभी जांचों से यह पता चला कि बच्चे के रक्त में इंफेक्शन या खराबी थी और रक्त में आयरन की भी बेहद कमी थी। बच्चे का इम्यून पॉवर तो बहुत ही कम था। यही वजह रही कि बच्चा बिना लक्षणों के होने के बावजूद भी पॉजिटिव आ रहा था। जांचों में कमी पता चलने के बाद बच्चे का 24 मई से उसकी कमजोरी के आधार पर 2 एंट्री वायरल ड्रग के कॉम्बिनेशन से इलाज शुरू किया गया, जिसके बाद बच्चा स्वस्थ हुआ और 28 और 30 मई को उसकी दोनों कोरोना जांचे लगातार नेगेटिव आई, जिसके बाद बच्चे को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया।

वायरस की स्टडी के लिए भेजा गया है पुणे
जेकेलोन के चिकित्सकों ने SMS मेडिकल कॉलेज के 5 अलग-अलग विभागों के विशेषज्ञों से राय ली। विशेषज्ञों ने सैंपलों की जांच जयपुर के अलावा महाराष्ट्र के पुणे में भी कराने का निर्णय लिया। विशेषज्ञों में शामिल बाल रोग, मेडिसिन, एंडोक्राइनोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और चेस्ट विभागों के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने इस केस की समरी तैयार कर चर्चा करने की बात कही। इसके अलावा पुणे की नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी से भी बात करके पता लगाया जाएगा कि इस बालक में आखिर ऐसा कौन सा प्रकृति का वायरस है, जो उसे नेगेटिव नहीं होने में देरी का कारण रहा। इसके अलावा विशेषज्ञ बालक की इम्यूनिटी की जांच भी कराएंगे। फिलहाल रिपोर्ट के आने का इंतजारर है।

जेकेलोन अस्पताल के सीनियर प्रोफेसर और नोडल ऑफिसर कोरोना डॉ. आरके. गुप्ता ने कहा कि यह प्रदेश ही नहीं बल्कि देश का पहला मामला है। अमूमन देखा गया है कि अधिकतम 28 दिन तक ही वायरस रहता है। केस की गंभीरता को देखते हुए इस पर शोध किया गया जिसमें पाया गया कि बच्चे के रक्त में खराबी थी और उसमें पोषक तत्वों की कमी के चलते इम्यून पॉवर भी कम था। जांच कराने के बाद बच्चे की असल बीमारी पकड़ में आई और फिर उसी दिशा में उसका बेहतर इलाज कर उसे कोरोना मुक्त किया गया।

यह भी पढ़ें:

कैंसर उपचार में मददगार है साइको थैरेपी, बढ़ाती है रोगियों का इम्यून सिस्टम

सीबीटी, सीडीटी और एसडी थैरेपी का उपयोग कैंसर इलाज में एक वरदान के रूप में सामने आ रहा है। एडवांस स्टेज के कैंसर रोगियों के इलाज के लिए भी यह थैरेपी मददगार साबित हो रही है। इस थैरेपी के जरिए रोगियों के इम्यून सिस्टम की क्षमता को बढ़ाया जाता है, जिससे रोगी में कैंसर से लड़ने की क्षमता बढ़ रही है।

04/02/2020

युवाओं और महिलाओं में बढ़ रहे हार्ट फेलियर के मामले, 50 साल से कम उम्र के लोग ज्यादा प्रभावित

जयपुर में एक चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। दरअसल 50 साल से कम आयु वर्ग के मरीजों में हार्ट फेलियर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि आमतौर पर 60 से 65 वर्ष की आयु के लोगों में हार्ट फेलियर होता है।

14/02/2020

Video: मेंढक के स्टेम सेल से बनाया दुनिया का पहला जिंदा रोबोट, जो करेगा कैंसर का इलाज

अफ्रीकी मेंढक के स्टेम सेल से अमेरिका के वैज्ञानिकों ने दुनिया का पहला जिंदा और सबसे छोटा रोबोट तैयार किया है, जिसका आकार में इंच के 25वें भाग यानी 1 मिमी जितना है।

15/01/2020

78 वर्षीय बुजुर्ग को मिली राहत, हार्ट वॉल्व का बिना चीरफाड़ के किया प्रत्यारोपण

जयपुर शहर के जगतपुरा स्थित एक निजी अस्पताल में 78 वर्षीय मरीज के हार्ट वॉल्व का बिना किसी चीरफाड़ के सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया है। अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियक सर्जन डॉ. समीर शर्मा ने बताया कि मरीज को करीब पांच साल पहले हृदय की नसों में रुकावट के बाद दो स्टंट लगाए गए थे।

05/03/2021

ईएसआई मॉडल हॉस्पिटल में मनाया गया विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस

अजमेर रोड स्थित ईएसआई हॉस्पिटल में मनोरोग विभाग की ओर से विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर चिकित्सकों के लिए अवसाद एवं आत्महत्या के उपचार और रोकथाम को लेकर सेमिनार एवं मानसिक स्वास्थ्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।

10/10/2019

वैज्ञानिकों का दावा, टी सेल थैरेपी से ठीक किया जा सकता है कैंसर

वैज्ञानिकों ने दावा किया कि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानि इम्यूनिटी को बढ़ाकर हर तरह के कैंसर से लड़ सकते हैं।

22/01/2020

बिना चीरफाड़ के अत्याधुनिक तकनीक से बदला हार्ट वॉल्व, मरीज की पहले हो चुकी बायपास सर्जरी

अधिक उम्र पर बायपास सर्जरी का इतिहास एवं कैंसर का सफल उपचार करा चुके 73 वर्षीय नरेन शर्मा (परिवर्तित नाम) को फिर से जब हृदय की गंभीर बीमारी हुई तो अत्याधुनिक तकनीक उनके लिए वरदान साबित हुई। ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन(टावी) द्वारा मरीज की सिकुड़ी हुई एओर्टिक वॉल्व को बिना ओपन चेस्ट सर्जरी के बदल दिया।

06/01/2020