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स्वास्थ्य

27 साल पहले हार्ट में लगी पेसमेकर की तार को बिना सर्जरी के निकाला, राजस्थान में इस तरह का पहला केस

Thursday, July 09, 2020 14:15 PM
लीड एक्सट्रैक्शन प्रक्रिया करने वाली टीम।

जयपुर। वर्षों पहले लगे पेसमेकर में संक्रमण होने के कारण उसे तार समेत हार्ट से निकालने के जटिल मामले को शहर के डॉक्टर्स ने सफलतापूर्वक कर दिखाया। प्रदेश में पहली बार इस तरह का केस हुआ है जब मरीज को 27 साल पहले लगे पेसमेकर और तार को इंफेक्शन होने पर बिना ओपन हार्ट सर्जरी के हृदय में से निकाला गया। लीड एक्सट्रैक्शन नामक यह प्रक्रिया इतनी जटिल थी कि तार निकालने में जरा भी चूक होती तो मरीज की उसी समय मौत हो सकती थी। शहर के इटरनल हॉस्पिटल में हुए इस केस में डॉक्टर्स ने नई तकनीक लीड लॉकिंग डिवाइस और टाइट रेल डिवाइस की सहायता से इसे सफल बनाया।

पेसमेकर के साथ तार नहीं निकालते तब भी मरीज की जान को खतरा
इटरनल हॉस्पिटल के इंटरवेंशनल व इलेक्ट्रोफिजीयोलॉजी डायेक्टर डॉ. जितेंद्र सिंह मक्कड़ ने बताया कि जयपुर से ही 41 वर्षीय फूलचंद मीणा (परिवर्तित नाम) को कम धड़कन के चलते मात्र 14 वर्ष की उम्र में 27 साल पहले पेसमेकर लगाया गया था। अब तक के समय में दो बार उनके पेसमेकर की बैटरी बदली गई थी। कुछ माह पहले पेसमेकर की जगह में सूजन व मवाद निकलने की स्थिति मे उन्हें इटरनल हॉस्पिटल में दिखाया गया, जहां कुछ टेस्ट होने के बाद यह पता चला कि उनके पेसमेकर और तार में इंफेक्शन हो गया है। डॉ. मक्कड़ ने बताया कि अगर यह समय पर नहीं निकाला जाता तो इंफेक्शन मरीज के पूरे शरीर में फैल जाता और मरीज की मौत हो सकती थी।

हृदय से तार निकालने में था बेहद जोखिम
अस्पताल के इलेक्ट्रोफिजीयोलॉजी कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. कुश कुमार भगत ने बताया कि पेसमेकर और तार इम्प्लांट करने के बाद जैसे-जैसे पुराना होता जाता है, वह शरीर की नसों और टिश्यू के साथ चिपकने लगता है। मरीज के पेसमेकर लगे 27 साल हो चुके थे। ऐसे में पेसमेकर की तार हृदय की नसों और टिश्यू के साथ अच्छे से चिपक गई थी। तार को निकालने में जरा सी लापरवाही होने पर नस या हृदय की झिल्ली फटने का खतरा था, जिससे मरीज की उसी वक्त मौत हो सकती थी।

नई तकनीक से सफल किया केस
इस अत्याधिक जटिल केस को नई तकनीक लीड लॉकिंग डिवाइस और टाइट रेल डिवाइस की सहायता से सफल किया गया। डॉ. जितेंद्र सिंह मक्कड़ ने बताया कि पेसमेकर की तार के साथ चिपकी नसों और दूसरे टिश्यू को निकालने के लिए पहले लीड लॉकिंग डिवाइस से तार को पकड़ा और टाइट रेल डिवाइस से धीरे-धीरे नसों और टिश्यू से उसे अलग किया गया। इस प्रक्रिया में 40 मिनट का समय लगा। हॉस्पिटल की एमडी और को-चेयरपर्सन मंजू शर्मा ने बताया कि यह बहुत ही जटिल केस था, जिसे सफल करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक और अनुभवी विशेषज्ञों की आवश्यकता थी। इटरनल हॉस्पिटल के अनुभवी डॉक्टर्स अपने मरीज को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए कटिबद्ध हैं। हमें खुशी है कि मरीज अब सामान्य जीवन जी पा रहे हैं। डॉ. अजीत बाना ने कहा कि लीड एक्सट्रैक्शन एक कठिन प्रक्रिया है जो आमतौर पर ओपन हार्ट सर्जरी द्वारा की जाती है और इस बार डॉ. मक्कड़ के नेतृत्व में इटरनल अस्पताल की कार्डियोलॉजी टीम ने बिना किसी ऑपरेशन के लीड लेकर अभूतपूर्व काम किया है। इस केस को सफल करने में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ कैलाश गढ़वाल, कार्डियक सर्जन डॉ. मनप्रीत सलूजा, कार्डियक एनेस्थिसया विशेषज्ञ डॉ. नवनीत मेहता व प्रशांत वार्षेय का सहयोग रहा।

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