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शिक्षा जगत

प्रदेश में 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षाएं 15 मई के बाद, मुख्य परीक्षा के बाद होंगे प्रायोगिक एग्जाम

Wednesday, December 09, 2020 11:25 AM
प्रतीकात्मक तस्वीर।

जयपुर। कोरोना काल के चलते इस बार शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से गड़बड़ा गई है। प्रदेशभर के स्कूल सहित सभी शिक्षण संस्थान बीती 20 मार्च से बंद हैं। अब सरकार ने प्रदेश में बोर्ड परीक्षाओं को लेकर भी बदलाव किया है। पहले बोर्ड की परीक्षाएं मार्च से शुरू होती थी, वह अब 15 मई के बाद शुरू होंगी। इस बीच बच्चों को पढ़ाई के लिए और समय मिल जाएगा। दसवीं और 12वीं की राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की परीक्षाएं होने के बाद ही प्रायोगिक परीक्षाएं होंगी। इसको लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं।  

बड़े सवाल कम, छोटे सवाल ज्यादा
राज्य के करीब 65 हजार से अधिक सरकारी और निजी स्कूलों के 80 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं पर सरकार के यह नए निर्देश लागू होंगे। विभाग के नए परीक्षा पैटर्न में कक्षा 9 से लेकर 12वीं तक के बच्चों की परीक्षा में बड़े सवालों की संख्या को कम कर दिया है और छोटे सवालों की संख्या बढ़ा दी है। छात्रों को हर सप्ताह गृह कार्य दिया जाएगा। इसके साथ ही उनको नोट बुक भी नियमित रूप से मेंटेन करनी होगी। उसी के आधार पर उनका इंटरनल असेसमेंट होगा।

ऐसे की प्रेक्टिकल की व्यवस्था
बोर्ड के प्रेक्टिकल वाले बच्चे जब भी अभिभावक से परमिशन लेकर स्कूल में आएंगे तो उस समय शिक्षक उनको होमवर्क के साथ ही प्रेक्टिकल वर्क भी कराना होगा, जिससे की उनके प्रेक्टिकल भी थ्यौरी के साथ ही नियमित रूप से चलते रहे।

वर्कबुक से शिक्षा
सरकार ने 1 से 5 तक के बच्चों को फ्री में वर्कबुक बांट दी है और 6 से 8 के छात्रों को वर्कबुक बांटी जा रही है। इनके माध्यम से बच्चे स्कूल में ऑफलाइन की पढ़ाई की तरह ही घर पर पढ़ाई कर सकते हैं। साथ ही शिक्षक घर-घर जाकर भी बच्चों को होमवर्क दे रहे है।

एक माह में आएंगे सैंपल पेपर
दसवीं व 12वीं बोर्ड परीक्षा के सैंपल पेपर शिक्षा विभाग की ओर से एक माह में आरबीएसई की वेबसाइट और शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर अपलोड कर दिए जाएंगे। इनसे भी छात्र पढ़ाई कर सकते हैं। वहीं शिक्षा विभाग कक्षा एक से लेकर 12वीं तक के सभी बच्चों की परीक्षाएं आयोजित करेगा। किसी भी बच्चे को बिना परीक्षा के प्रमोट नहीं किया जाएगा। 10-12वीं की बोर्ड परीक्षाओं के साथ ही पाचवीं व आठवीं के बच्चों की भी बोर्ड की परीक्षा होगी।
 
ऐसे होगा अंकों का विभाजन
कक्षा नौ से 12वीं तक 20 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन और 80 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा के होंगे। वहीं इनमें प्रायोगिक परीक्षा के अंक अलग होंगे। कक्षा 6 से 8वीं तक के बच्चों की 40 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांकन के दिए जाएंगे और 60 फीसदी अकों में से 10 फीसदी अंक मौखिक व 50 प्रतिशत अंक लिखित परीक्षा के होंगे। इसके बाद कक्षा 3 से लेकर 5 तक के बच्चों को 50 प्रतिशत अंक आंतरिक मूल्यांक, दस प्रतिशत अंक मौखिक और 40 प्रतिशत अंकों की लिखित परीक्षा आयोजित की जाएगी। वहीं, कक्षा एक से 3 तक के बच्चों को अभिभावकों व शिक्षकों की सहायता से पूर्ण की गई कार्य पुस्तिकाओं के आधार पर आगामी कक्षा में क्रमोन्नत किया जाएगा।  

एक से आठवीं कक्षा का रिवाइज्ड सिलेबस जारी
कोरोना काल में बच्चों की नियमित पढ़ाई नहीं होने के कारण शिक्षा विभाग ने कक्षा एक से 8वीं तक के बच्चा का रिवाइज्ड सिलेबस भी जारी कर दिया है। इसमें 48 फीसदी सिलेबस को कम करते हुए 52 फीसदी सिलेबस को रखा गया है। इसको लेकर प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर दिया है। इससे पहले विभाग ने कक्षा नौ से 12वीं तक के बच्चों का सिलेबस 40 फीसदी कम करते हुए 60 फीसदी तय किया है।

निशंक कल लेंगे सीबीएसई की ऑनलाइन बैठक
केन्द्रीय मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, नई दिल्ली (सीबीएसई) की 10 दिसंबर को ऑनलाइन बैठक लेंगे। इस दौरान कोरोना के चलते स्कूलों की पढ़ाई, परीक्षाओं के आयोजन सहित अन्य मुद्दों पर मंथन किया जाएगा। इसके बाद सीबीएसई की बोर्ड सहित अन्य परीक्षाओं की संभावित तिथियां भी निर्धारित होगी। परीक्षाओं को करीब 15 से 20 दिन आगे बढ़ाया जा सकता है। ये परीक्षाएं फरवरी अंतिम माह के बजाए मार्च के मध्य या अंतिम से शुरू की जा सकती है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक सौरभ स्वामी ने कहा कि राज्य सरकार के आदेश पर प्रदेशभर के सभी स्कूलों के बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाई से जोड़ने को लेकर शिक्षा विभाग ने नए निर्देश जारी किए हैं। इसमें कक्षा एक से लेकर 12 तक के विद्यार्थियों के परीक्षाओं के पैटर्न में भी बदलाव किए है। वहीं 9 से 12वीं कक्षा तक के बच्चों के परीक्षा पैटर्न में मल्टीपल और एक व दो नंबर के सवाल बढ़ाए गए है। लंबे उत्तर वाले सवालों को कम कर दिया गया है।

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