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बांसवाडा

फर्जी हस्ताक्षर कर बाबू बनाता था बदूकों के लाइसेंस

Wednesday, March 04, 2020 23:25 PM
आरोपी बाबू प्रकाश भोई

   परतापुर ।    गढ़ी एसडीएम दफ्तर से फर्जी तरीके से टोपीदार बंदूक के लाइसेंस जारी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। मंगलवार शाम 7 बजे प्रशासन और पुलिस की एसडीएम कार्यालय में रेड के बाद यह खुलासा हुआ।  

फर्जी लाइसेंस जारी करने की कारस्तानी कोई ओर नहीं बल्कि उनके ही कार्यालय का बाबू प्रकाश भोई कर रहा था। महज 10 से 12 हजार के कमीशन के लालच में बाबू प्रकाश धड़ल्ले से एक के बाद एक हथियार लाइसेंस जारी करता रहा। प्रकाश अब तक एक, दो नहीं बल्कि 100 से भी ज्यादा टोपीदार बंदूक के लाइसेंस जारी कर चुका है। पूछताछ के बाद पुलिस ने रात तक अलग-अलग लोगों से 22 बंदूकें जब्त भी कर ली। करीब 3 घंटे तक गढ़ी एसडीएम कार्यालय में चली सर्च के बाद प्रकाश के घर पर भी पुलिस ने तलाशी ली। प्रकाश के किसी मित्र को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है जिसके घर से हथियार जारी करने के दस्तावेज बरामद हुए हैं। इस पूरे फर्जीवाड़े में दलाल गिरोह है। तीन दलालों को भी पुलिस हिरासत में लिया है। फिलहाल पुलिस प्रकाश भोई से उन सभी लोगों के नाम-पते पता कर अब तक जारी हाÞे चुकी बंदूकें जब्त करने में जुटी है। मामले का खुलासा तब हुआ जब उदयपुर के गनहाउस में एक के बाद एक टोपीदार बंदूक के खरीददारों का पहुंचना शुरू हुआ। लाइसेंस पत्र में कुछ त्रुटियां होने और एकाएक टोपीदार बंदूक धारियों की संख्या बढ़ने पर गन हाउस संचालक को संदेह हुआ और उसने गढ़ी एसडीएम रामचंद्र खटीक को जानकारी दी। इस पर गढ़ी एसडीएम भी हैरत में पड़ गए। गढ़ी एसडीएम ने गन लाइसेंस से मंगवाए हथियार अनुज्ञा पत्रों का कार्यालय से जांच कराई तो पता चला कि एक भी जारी नहीं किया है। उन्होंने कलेक्टर और एसपी से बात की। जिसके बाद सोमवार को कलेक्ट्रेट में पूरी कार्रवाई को अंजाम देने की रणनीति बनाई गई। शाम करीब 7 बजे गढ़ी एसडीएम कार्यालय में एडीएम नरेश बुनकर, एसपी केसरसिंह शेखावत, गढ़ी एसडीएम रामचंद्र खटीक ने डीएसआई टीम और भारी पुलिस लवाजमे के साथ दबिश दी। जहां, रात 10 बजे तक दस्तावेज खंगाले गए। इसके बाद प्रकाश भोई के घर की तलाशी ली गई। बताया जा रहा है कि प्रकाश को हाल ही में कश्मीर में एक आईएस अफसर के फर्जी लाइसेंस प्रकरण में गिरफ्तार होने के बाद खुद पर कार्रवाई का डर सताने लगा तो दस्तावेज गढ़ी में ही किराए पर रह रहे उसके एक मित्र के यहां छिपा दिए थे। जिसे भी पुलिस ने जब्त कर लिए। रात को प्रकाश को गढ़ी थाने लाया गया। जहां पूछताछ पर उसने पूरे फर्जीवाड़े का सच उगल दिया। प्रकाश ने गढ़ी, परतापुर, खाोड़न, आंजना, अरथूना और बांसवाड़ा शहर में भी कइयों को टोपीदार बंदूक लाइसेंस जारी करना बताया।

हो सकता है आजीवन कारावास-  
जाली दस्तखत हथियार लाइसेंस जारी करने पर पुलिस आईपीसी की धारा 420, 467, 468, 471, 469, 419 और 120बी में प्रकरण दर्ज कर सकती है। अगर इन आरोपों में दोष सिद्ध हो जाता है तो आजीवन कारावास तक की सजा का प्रावधान है। गिरोह के दलाल लाते थे ग्राहक, 12 हजार रुपए कमीशन पर बेचा इमान - प्रकाश साल 2018 से यह फर्जीवाड़ा कर रहा था। उसने चार से पांच दलालों के नाम भी बताए है जो उसे ग्राहक लाकर देते थे। दलाल ग्राहकों से 50 से 60 हजार शुल्क वसूलते थे और प्रकाश को 10 से 12 हजार का हर लाइसेंस की एवज में कमीशन देते थे। महज कुछ हजार की लालच में प्रकाश ने लोगों की जान के लिए बेहद खतरनाक इन हथियारों का सौदा शुरू कर दिया। प्रकाश के खुलासे के बाद पुलिस ने रात तक एवं बुधवार को करीबन 22 बंदूकें भी जब्त कर ली हैं। ऐसे में इस मामले में कई गिरफ्तारियां हो सकती है।
 
एसपी केसरसिंह शेखावत ने बताया कि जाली तरीके से जारी किए गए अनुज्ञा पत्र से करीब Þ100 से ज्यादा टोपीदार बंदूकें खरीदी जाने की आशंका है। ऐसे में इन अवैध हथियारों की बरामदगी के लिए बांसवाड़ा डिप्टी अनिल मीणा के नेतृत्व में गढ़ी,अरथूना, आनंदपुरी, लोहारिया और सदर थानाधिकारी की एक विशेष टीम बनाई है जो इन हथियारों की बरामदगी करेगी। बुधवार को भी कार्यवाही जारी रही एवं 22 अवैध हथियार बरामद भी कर लिए जा चुके है। बुधवार को 19 जनों के विरूद्ध मुकदमा दर्ज कर अनुसंधान प्रारंभ किया। 
 
पिता की मौत के बाद अनुकंपा पर प्रकाश को मिली थी नौकरी-  
प्रकाश अनुकंपा नियुक्ति पर साल 2004 में नौकरी पर लगा था। प्रकाश के पिता प्रभू लाल अस्पताल में चतुर्थश्रेणी कर्मचारी थे। उनकी मौत पर प्रकाश को अनुकंपा में नौकरी मिली। इससे पहले वह तहसील में कार्यरत था। पांच साल पहले गढ़ी एसडीएम कार्यालय में लगा। कार्यालय के सामने ही उसका मकान है। प्रकाश द्वारा एसडीएम रामचंद्र खटीक के अलावा प्रभू दयाल शर्मा और पूजा पार्थ की फर्जी सील बनाने की आशंका है। हालांकि, टोपीदार बंदूक लाइसेंस बनाने के लिए फाइल एसडीएम, सीआई, तहसीलदार, रेंजर के पास जाती है लेकिन, प्रकाश एसडीएम की ही फर्जी दस्तखत कर देता था।
 

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