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झालावाड

एनीकटों के गेट नहीं लगाए, व्यर्थ बह रहा पानी

Friday, November 01, 2019 00:50 AM
सुनेल। एनीकटों से व्यर्थ बह रहा पानी।

 सुनेल। कस्बे के समीप आहु नदी पर लाखों रुपए की लागत से करीब 10 वर्ष पूर्व एनीकट का निर्माण करवाया था। बारिश में लबालब पानी भरने के बाद सर्दी व गर्मी में इस एनिकट से कस्बे में जलापूर्ति की जाती थी। लेकिन, पिछले 2 सालों से कस्बे में पिपलाद बांध से जलापूर्ति शुरू कर दी है। जिसकी वजह से पीएचडी विभाग द्वारा लाखों रुपए के एनिकट पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

      इस साल तो विभाग ने अभी तक पानी रोकने के लिए इस एनीकट के गेट भी नहीं लगाए। जिससे आहू नदी की अथाह जल राशि का संग्रह नहीं होने से किसानों को आगामी दिनों में जल संकट की समस्या से दो-चार होना पड़ेगा। हर साल बरसात खत्म होने के साथ ही पीएचडी विभाग द्वारा एनीकट के गेट लगा दिए जाते है। जिससे एनिकट लबालब भर जाता था। 
     इससे कस्बे में जलापूर्ति के साथ नदी के आसपास के क्षेत्र के किसान भी अपनी खेती के लिए एनीकट से सिंचाई का पानी उपयोग में लेते थे। जिससे क्षेत्र के किसानों को बंपर पैदावार होती थी। लेकिन, इस साल विभाग में एनीकट के गेट लगाने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
    पीएचडी विभाग के कनिष्ठ अभियंता जेपी डागल ने बताया कि इस वर्ष और नदी के एनीकट पर गेट लगाने के लिए विभाग ने कोई टेंडर नहीं किए हैं, क्योंकि कस्बे में जलापूर्ति के लिए अब पिपलाद बांध मुख्य पेयजल स्रोत बन गया है। यहां से कस्बे में पूरे वर्ष पानी उपलब्ध होता है, इस कारण अब विभाग द्वारा इस एनिकट पर कोई खर्च नहीं किया जाएगा।
  आहू नदी पर 8 एनिकट, 3 हजार बीघा भूमि होती है सिंचित...
  सुनेल क्षेत्र की लाइफ लाइन आहु नदी पर पानी रोकने के लिए 8 एनीकट हैं। जिससे क्षेत्र की 3000 बीघा भूमि सिंचित होती है, लेकिन इस वर्ष अच्छी बारिश के चलते एक ओर किसानों की खरीफ की फसल तबाह हो गई है। जिससे किसानों को रबी की फसल की चिंता सताने लगी है। जिन किसानों की खेतीहर भूमि आहू नदी व एनीकट के समीप है, वे हरवर्ष रबी की फसल की सिंचाई एनीकट से करते हैं, लेकिन इस वर्ष अक्टूबर माह के दूसरे पखवाड़े में भी जिम्मेदारों ने एनिकट के गेट नहीं लगाए।
    जिससे किसान चिंतित दिखाई दे रहे हैं। एनीकट में पानी का जल संग्रहण नहीं होने से किसानों के सामने फसलों को पानी पिलाने की समस्या खड़ी हो जाएगी। किसानों ने मांग की है कि सांगरिया से लाल गांव तक आहू नदी पर बने एनीकट के गेट समय रहते लगवाए जाएं, ताकि किसानों को राहत मिल सके।
   किसानों के लिए वरदान है एनिकट ... 
  कस्बे के समीप आहू नदी पर बना एनीकट गत वर्षों से किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। हर साल बारिश के बाद इसके गेट लगने से यह लबालब भर जाता है। जिससे आसपास के किसानों के कुओं में जलस्तर मेंटेन रहता है और एनीकट का पानी सिंचाई के काम में आता है। जिससे फसल की बंपर पैदावार होती थी। लेकिन, इस बार गेट नहीं लगाने से आहू नदी के दोनों छोर के किसान चिंतित दिखाई दे रहे हैं।
  2 साल से क्षतिग्रस्त है एनिकट...
  आहू नदी पर बनाए निकट बरसात के समय नदी में उफान आने की वजह से एनीकट के कई ब्लॉक क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इन पर विभाग का ध्यान नहीं है। हर साल नदी में उफान के चलते एनीकट और अधिक क्षतिग्रस्त होता चला जा रहा है। अब तो एनीकट की हालत यह हो गई है कि बीच के ब्लॉक के तो पत्थर व सरिए निकलना शुरू हो गए हैं। जिससे आने वाले समय में एनीकट से खतरा होने की संभावना बनी हुई है। 
   आहू नदी पर एनीकट के समीप ग्राम पंचायत द्वारा घाट का भी निर्माण किया गया। जिससे एनीकट लबालब भरने के बाद कस्बे वासी घाट पर आकर स्नान करते हैं। इसके साथ ही घाट पर कस्बे वासी कई कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं, लेकिन इस बार एनीकट नहीं का पानी नहीं रोकने की वजह से लाखों रुपए का घाट भी बेकार साबित हो जाएगा। 
   कस्बेवासियों व ग्रामीणों ने आहु नदी पर बने गेट लगाने के लिए संबंधित विभाग को कई बार अवगत करवा दिया गया है, लेकिन अक्टूबर का महीना गुजरने को है, विभाग ने अभी तक इस ओर कोई कदम नहीं उठाया है। ग्रामीणों की मांग है कि जल्द से जल्द एनीकट के गेट लगाए जाए, ताकि लाखों लीटर व्यर्थ पानी बहने से बच सकें।
     एनीकट के गेट नहीं लगाने का सीधा-सीधा फायदा खनन माफियाओं को हो रहा है। पीएचडी विभाग ने एनीकट के गेट बंद करने का टेंडर नहीं निकाला। जिससे 7 एनिकट के गेट बंद नहीं हुए। पहले हर वर्ष पीएचईडी विभाग 7 एनीकट के गेट का टेंडर कर जल राशि को संचित रखने के लिए टेंडर निकालता था। मगर इस वर्ष 7 एनिकटों का गेट बंद करने का टेंडर नहीं निकाला।
   इस वर्ष हमारा जल स्रोत पिपलाद डैम होने की वजह से हमारे द्वारा एनीकट के गेट बंद करने का टेंडर नहीं किया। अब हमारा जल स्रोत एनीकट नहीं रहा। इस वजह से हम एनीकट का गेट लगवाने में असमर्थ हैं। इसके लिए ग्राम पंचायत व स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार है। वहीं इनके गेट लगवा सकते हैं। 
-राकेश कुमार, एसई पीएचईडी झालावाड़
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