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Tuesday 24th of September 2019
राजस्थान

सायरन बजाकर बीसलपुर बांध के खोले गेट

Monday, August 19, 2019 15:20 PM
बीसलपुर बांध के विहंगम दृश्य को देखने उमड़े सैलानी।

जयपुर। राज्य के कई जिलों को पानी पिलाने वाले बीसलपुर बांध में पानी की भराव क्षमता 315.50 छूने के साथ ही प्रशासन ने पूजा-अर्चना कर करीब छह हजार क्यूसेक पानी बनास में छोड़ दिया गया। हालांकि प्रशासन ने गांवों में सायरन के माध्यम से चेतावनी जारी कर दी थी। उम्मीद की जा रही थी कि कभी भी बांध के गेट खोलकर पानी की निकासी कर दी जाएगी। बांध के अधिकारी-कर्मचारियों ने दोपहर तीन बजे बांध के गेट खोलने की तैयारियां शुरू कर दी। शाम चार बजे पुन: सायरन बजने के साथ ही शाम पांच बजे जिला कलेक्टर आरसी ढेनवाल और बांध के अधिकारियों की मौजूदगी में पूजा अर्चना के बाद गेट नम्बर 9 और 10 खोल दिए गए। बांध परियोजना के सहायक अभियंता मनीष बंसल ने बताया कि बांध के गेट खुलने के साथ ही बनास नदी की डाउन स्टीम में तेजी से पानी चला गया।

दो गेट खोलकर छोड़ा, छह हजार क्यूसेक पानी
बांध के दोनों गेटों को 50-50 सेमी तक खोलकर प्रत्येक गेट से तीन-तीन हजार क्यूसेक पानी की निकासी की।

त्रिवेणी का गेज कम होने से धीरे-धीरे आया पानी
त्रिवेणी का गेज कम होने से भराव क्षमता 315.50 पहुंचने में काफी समय लगा। हांलाकि बांध पर आज भी बड़ी संख्या में लोग बांध के गेट खुलने के इंतजार में खड़े हुए थे। गौरतलब है कि वर्ष 9 अगस्त, 2016 को भी बांध की भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर दर्ज होने पर बांध के गेट खोलकर निकासी की गई थी।

24 दिन में आया 10.63 आरएल मीटर पानी

बांध 24 दिन में ही लबालब हो गया। बारिश शुरू होने के बाद 27 जुलाई से बांध में पानी की आवक शुरू हुई थी और आज बांध अपनी पूर्ण भराव तक पहुंच गया। इन 24 दिनों में बांध में 10.63 आरएल मीटर पानी की आवक हुई।

54 गांवों को किया अलर्ट
बांध प्रशासन ने गेट खोलने से पहले सायरन बजाकर बनास नदी के डाउन स्ट्रीम में बसे 54 गांवों में अलर्ट जारी किया गया। सायरन जब बजा तो उसकी आवाज पांच किलोमीटर दूर तक सुनी गई, जिससे बनास नदी के अंदर काम कर रहे लोग हट गए और मवेशियों को भी हटा लिया गया।

बांध के गेट खोलने के बाद भी त्रिवेणी से पानी की आवक लगातार हो रही है। जितना पानी जा रहा है, उतना ही पानी आ रहा है। बांध के लेवल को 315.50 आरएल मीटर ही रखा जाएगा। इस हिसाब से दो गेटों को 50-50 सेमी तक ही छोड़ा गया है।
- विरेन्द्र सागर, अधीक्षण अभियंता, बीसलपुर बांध परियोजना