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Wednesday 22nd of May 2019
राजस्थान

झालावाड़-बारां में मां-बेटे का कांग्रेस के पास कोई तोड़ नहीं

Sunday, April 21, 2019 10:50 AM
वसुंधरा राजे (फाइल फोटो)

जयपुर। प्रदेश में झालावाड़-बारां ऐसा लोकसभा क्षेत्र है, जहां तीन दशक में मां-बेटे के सामने कांग्रेस के बेबस है और अंगद का पांव बने मां बेटे का कोई तोड़ नहीं निकाल पाई है। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने 1989 में कांग्रेस के शिवनारायण को हराकर अपने पांव जमाए थे, जो 1999 के चुनाव तक हिल नहीं पाए। उनके विधानसभा में जाने के बाद पार्टी ने वर्ष 2004 में उनके पुत्र दुष्यंत सिंह को चुनाव मैदान में उतारा, जो अब तक अपराजेय हैं। कांग्रेस बार बार उम्मीदवार बदलने के बावजूद उनका तोड़ नहीं निकाल पाई।

झालावाड़ में वर्ष 1962 में पहली बार कांग्रेस को जीत हासिल हुई थी तथा वर्ष 1984 में भी जीत का मौका मिला, लेकिन उसके बाद कोई दमदार उम्मीदवार नहीं मिला जो भाजपा को हरा सके। कांग्रेस ने भाजपा उम्मीदवारों को हराने के लिए जातिगत रणनीति भी अपनाई, लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। वर्ष 1989 में वसुंधरा के सामने शिवनारायण तथा 1991 एवं 1996 में मान सिंह कांग्रेस के टिकट पर आए, लेकिन टिक नहीं पाए। वर्ष 1998 में वसुंधरा ने भरत सिंह को हराया तथा 1999 में डॉ. अबरार अहमद आए, लेकिन वह भी जीत नहीं पाए। हालांकि कांग्रेस ने उन्हें बाद में राज्यसभा का सदस्य बनाकर केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री के पद से भी सुशोभित किया था।

इसी तरह जब वसुंधरा राजे को प्रदेश की राजनीति में लाया गया तो 2004 में उनकी जगह पुत्र दुष्यंत को चुनाव लड़ाया गया, जिनके सामने संजय गुर्जर पराजित हुए। वर्ष 2009 में गहलोत सरकार में मंत्री प्रमोद जैन भाया की पत्नी उर्मिला जैन तथा 2014 में प्रमोद जैन ने दुष्यंत का सामना किया, लेकिन हार पर संतोष  करना पड़ा।  इस बार दुष्यंत के सामने कांग्रेस ने नए चेहरे प्रमोद शर्मा को खड़ा किया है।