Dainik Navajyoti Logo
Saturday 17th of August 2019
इंडिया गेट

प्रचंड होती दिव्यता

Wednesday, May 15, 2019 10:15 AM
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (फाइल फोटो)

- शिवेश गर्ग
यों तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की दिव्य बौद्धिकी से मुल्क अक्सर रुबरु होता रहा है। जब मुल्क में कोई चुनाव चल रहा हो तब भी और जब चुनाव नहीं हो तब भी। पर चुनावों में अक्सर उनका ज्ञान वायु तीव्र होता रहा है और अबके आम चुनाव में तो और प्रचंड होता जा रहा है। पिछले दिनों एक खबरिया चैनल के साक्षात्कार में उनके इस प्रचंड ज्ञान से मुल्क रुबरु हुआ। साक्षात्कार में बालाकोट स्ट्राइक का जिक्र करते हुए नरेन्द्र मोदी ने बताया कि बादलों के कारण स्ट्राइक करने को लेकर अधिकारी सशंकित थे, लेकिन उनने आगे बढ़ने को कहा, इस एक्सपर्ट सलाह के साथ कि बादलों की वजह से पाकिस्तानी रडार पर हमारे विमान नहीं आएंगे।

और भारतीय सेना ने अपना तकनीकी ज्ञान छोड़कर प्रधानमंत्री की सलाह पर गौर फरमाया और नतीजा मुल्क के सामने है। जो लोग प्रधानमंत्री के इस तकनीकी कौशल के कायल नहीं हैं वे उनका मजाक उड़ा रहे हैं। कई अखबारों ने भी कार्टून बनाकर उनके इस बयान की खिल्ली उड़ाई है। टाइम्स आफ इंडिया ने उनके बयान के हवाले से एक कार्टून छापा है जिसमें बालाकोट में ध्वस्त मदरसे के आंतकवादी बादलों पर बैठ मौज कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस बयान का खूब मजाक उड़ा है। कई लोग तो उनके इस बयान से अचानक चिंतित हो गए हैं और ऐसे व्यक्ति के हाथों देश कैसे सुरक्षित रहेगा?

जहां एक ओर प्रधानमंत्री दावा करते फिर रहे हैं कि केवल वे ही हैं जिनके हाथ में यह मुल्क सुरक्षित रह सकता है। टुकड़े-टुकड़े गैंग यानी पूरा विपक्ष के हाथ में यह मुल्क तो कतई सुरक्षित नहीं रह सकता है। यह बात और है उनके जिगरी यार बराक ओबामा के मुल्क अमेरिका में छपने वाले मैगजीन ने उन्हें ही डिवाईडर इन चीफ के तमगे से नवाजा है। बहरहाल, यह तो नरेन्द्र मोदी और उनके पसंदीदा मुल्क अमेरिका के बीच का मामला है। कमाल की बात तो यह है कि प्रधानमंत्री उनकी खिल्ली उड़ाने वालों को थका देने पर आमदा है।

अभी समूचा मुल्क उनके रडार और बादल वाले बयान पर मौज ले ही रहा था कि उनने हलके में एक और आइटम टपका दिया है। नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि 1987-88 में उनने डिजीटल कैमरे का इस्तेमाल किया था और ईमेल के जरिए उसकी फोटो को भी भेजा था। मुमकिन है प्रधानमंत्री अपने इस बयान के जरिए मुल्क की जनता को यह बतलाना चाहते हों कि वे तकनीकी ज्ञान को लेकर किस कदर सजग हैं। पर उनकी यह सजगता भी खिल्ली उड़ाने वालों को रास नहीं आयी। वे बेवजह की खामियां निकालने लगे।

गुगल गुरू से खोज-खोज कर यह बतलाने लगे कि नरेन्द्र मोदी जिस कालखंड में डिजिटल होने की चर्चा कर रहे हैं उस समय तो ईमेल चलन में आया ही नहीं था और डिजीटल कैमरा भी उनके पसंदीदा मुल्क अमेरिका में तभी-तभी आया था। गौर करने की बात है कि नरेन्द्र मोदी यह काम 87-88 में कर चुके हैं। गूगल का ज्ञान तो यह बलताला है कि 1992 में नेथेनियल बोरेन्सटीन ने सबसे पहले ईमेल पर फोटो अटैच करके भेजी थी। नरेन्द्र मोदी ने भी आडवाणी का फोटा अटैच किया था। इसी तरह अमेरिका में 1986 में मेगाविजन कंपनी ने डिजीटल कैमरा तैयार किया था, लेकिन तब बाहर के बाजारों में बिकने के लिए नहीं भेजा गया था। अमेरिका में तब इसकी कीमत साढ़े छह लाख रुपयों से अधिक थी।

दूसरी ओर, गूगल का ज्ञान यह भी कहता है कि नरेन्द्र मोदी पहली बार 1993 में अमेरिका गए थे। अब इसे तो दैविक घटना ही माना जाना चाहिए कि प्रधानमंत्री के पास यह कैमरा दिव्य तरीके से 1987 में ही पहुंच चुका था। अब बात कीमत की न करें, जब बात दिव्यता की हो तो कोई कीमत मायने नहीं रखती। इस बात का भी की मायना नहीं है नरेन्द्र मोदी 1987 में 6 लाख का अमेरिकी डिजीटल कैमरा रखने के कुछ साल पहले तक गुजरात के बडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे।

यह बात और है कि कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि जिस कालखंड में नरेन्द्र मोदी बडनगर रेलवे स्टेशन पर चाय बेचते थे, तब बडनगर नाम का रेलवे स्टेशन भारतीय रेलवे के मैप पर था ही नहीं। लिहाजा, जब बात दैवीय शक्ति और दिव्यता की हो तो इस बात का क्या मतबल है कि नरेन्द्र मोदी ने यह कैमरा कहां से और कैसे खरीदा? क्या फर्क पड़ता है कि विज्ञान और किताबों से उनका कभी रिश्ता रहा है या नहीं। हकीकत तो यही है कि नरेन्द्र मोदी का इस बेचारे मुल्क का प्रधानमंत्री बनना एक दैवीय संयोग है। सो, उनकी हर बात दिव्य है।

दिव्य यह है कि उनने हिमालय में तपस्या की है। उनने वडनगर जैसे अदृश्य रेलवे स्टेशन पर चाय बेची है। वे मगरमच्छों से भरे तालाब में गेंद के लिए कूद पड़े हैं है और गेंदे के साथ मगरमच्छ का एक बच्चा भी पकड़ लाए हैं। असल में, नरेन्द्र मोदी की खिल्ली उड़ाने वाले यह नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं, क्योंकि वे यह भी समझते कि आखिर दिव्यता क्या किस शै का नाम है?