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Thursday 19th of September 2019
भारत

354 करोड़ से अधिक के बैंक घोटाले में CM कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी गिरफ्तार

Tuesday, August 20, 2019 11:10 AM
रतुल पुरी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के भांजे रतुल पुरी को 354 करोड़ रूपये के बैंक धोखाधड़ी में कथित रूप से संलिप्त होने के मामले में धनशोधन रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी के एक अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 18 अगस्त को पुरी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया था। इसके अलावा उसके पिता एवं मोजेर बियर कंपनी के प्रोमोटर दीपक पुरी, माता नीता पुरी और अन्य के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किया है। सीबीआई अधिकारियों ने सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया की शिकायत के आधार पर राष्ट्रीय राजधानी प्रक्षेत्र में कई स्थानों पर छापे भी मारे हैं।


बैंक ने अपनी शिकायत में कहा है कि मोजेर बियर इंडिया लिमिटेड और उसके निदेशकों ने बैंक से भारी मात्रा में धन आहरण के लिए फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किया था। पुरी मोजेर बियर कंपनी के कार्यकारी निदेशक थे और 2013 में इस्तीफा दे दिया था। 

क्या है बैंकिंग फर्जीवाड़ा केस
मध्यप्रदेश के सीएम कमलनाथ के भांजे और मोजर बेयर के तत्कालीन कार्यकारी निदेशक रतुल पुरी के खिलाफ शनिवार को सीबीआई ने केस दर्ज किया था। ये मामला सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 354.51 करोड़ रुपये की चपत लगाने से जुड़ा है। रतुल के अलावा एमबीआईएल के प्रबंध निदेशक दीपक पुरी, कंपनी में पूर्णकालिक निदेशक उनकी पत्नी नीता पुरी, एमबीआईएल के पूर्व कार्यकारी निदेशक रतुल पुरी, निदेशक संजय जैन, विनीत शर्मा और अन्य अज्ञात सरकारी सेवकों और अन्य व्यक्तियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक दुर्व्यव्यवहार और आपराधिक साजिश रचने का मामला दर्ज किया गया था।

वीवीआईपी हलिकॉप्टर खरीद में रिश्वत लेने का आरोप
रतुल पुरी अगस्ता-वेस्टलैंड मामले में जांच के घेरे में हैं। रतुल पुरी पर उनकी कंपनी के जरिए कथित तौर पर रिश्वत लेने का आरोप है। प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि रतुल पुरी की स्वामित्व वाली कंपनी से जुड़े खातों का उपयोग रिश्वत की रकम लेने के लिए किया गया। अगस्ता वेस्टलैंड हेलिकॉप्टर डील 3 हजार 600 करोड़ रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग का मामला है। भारतीय वायुसेना ने 12 वीवीआईपी हेलि‍कॉप्टरों की खरीद के लिए अगस्ता-वेस्टलैंड कंपनी के साथ करार किया गया था। यह करार साल 2010 में 3 हजार 600 करोड़ रुपये का था, लेकिन जनवरी 2014 में भारत सरकार ने इस करार को रद्द कर दिया था। आरोप है कि इस करार में 360 करोड़ रुपये का कमीशन दिया गया था। इस मामले में रतुल पुरी का भी नाम सामने आया था, लेकिन हालांकि इस केस में आरोपी से सरकारी गवाह बने राजीव सक्सेना ने पूछताछ में रतुल पुरी का नाम छिपा लिया था।