Dainik Navajyoti Logo
Thursday 19th of September 2019
ओपिनियन

भ्रष्टाचार पर मोदी की सर्जिकल स्ट्राइक

Wednesday, September 04, 2019 11:05 AM
नरेंद्र मोदी (फाइल फोटो)

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर प्रहार का वादा देशवासियों से किया था और कहा था कि ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार यह बयान दोहराया था कि जिन्होंने देश को लूटा है, उन्हें पाई-पाई लौटानी पड़ेगी। 2014 से अब तक कइयों को जेल के दरवाजे तक भेज चुका हूं। कुछ जमानत पर हैं या कुछ कोशिश में इधर-उधर भाग रहे हैं, लेकिन अगले पांच साल में उन्हें जेल में डालने का वक्त है। भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार की सर्जिकल स्ट्राइक की लगातार जारी है। ताजा घटनाक्रम में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड यानी सीबीआईसी ने भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों के चलते 22 सीनियर अफसरों को जबरन सेवा निवृत्त किया है। सीबीआईसी वैश्विक स्तर पर जीएसटी और आयात कर संग्रह की निगरानी करता है। इस साल जून से तीसरी बार भ्रष्ट कर अधिकारियों पर कार्रवाई की गई है। भारत में वैसे तो अनेक समस्याएं विद्यमान हैं जिसके कारण देश में विकास की रफ्तार धीमी है। लेकिन तमाम समस्याओं में से भ्रष्टाचार की समस्या देश के विकास को सर्वाधिक बाधित कर रही है। भ्रष्टाचार की समस्या से सारा देश परेशान है। वास्तव में पिछले 70 सालों से भ्रष्टाचार का कीड़ा लोकतंत्र की जड़ों को खोखला करने का काम कर रहा है। अब मोदी सरकार ने इस कीड़े को मारने की कार्रवाई शुरू कर दी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार पर प्रहार का वादा देशवासियों से किया था और कहा था कि ‘ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा’। लोकसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कई बार यह बयान दोहराया था किजिन्होंने देश को लूटा है, उन्हें पाई-पाई लौटानी पड़ेगी। 2014 से अब तक कइयों को जेल के दरवाजे तक भेज चुका हूं। कुछ जमानत पर हैं या कुछ कोशिश में इधर-उधर भाग रहे हैं, लेकिन अगले पांच साल में उन्हें जेल में डालने का वक्त है। देश की जनता से किए इस वादे पर आगे बढ़ते हुए अपने दूसरे कार्यकाल में मोदी सरकार ने भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक कर दी है। पिछले महीने एक बड़े खुलासे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में यह जानकारी देते हुए बताया है कि सरकार ने एफआर 56 (जे) के तहत ग्र्रुप ए के 36,756 और ग्रुप बी के 82,654 अधिकारियों के व्यवहार और कामकाज की पड़ताल की थी। लगभग 1.20 लाख अधिकारियों की यह समीक्षा जुलाई 2014 से मई 2019 के कार्यकाल के लिए की गई थी। इनमें से 312 के खिलाफ कार्रवाई की गई।

बीते जून में अभूतपूर्व कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने इनकम टैक्स विभाग के 12 वरिष्ठ अफसरों को जबरन रिटायरमेंट दे दिया है। डिपार्टमेंट आॅफ पर्सनल एंड एडमिनिस्ट्रेटिव रिफॉर्म्स के नियम 56 के तहत वित्त मंत्रालय ने इन अफसरों को समय से पहले ही रिटायरमेंट दे दिया है। इनमें चीफ  कमिश्नर और प्रिंसिपल कमिश्नर स्तर के अफसर थे। उन पर सामान्य भ्रष्टाचार, अवैध सम्पत्ति, कारोबारी से दबाव डालकर धन उगाही, घूस और महिला सहयोगियों के यौन उत्पीड़न तक के आरोप थे। सरकार के इस कदम का देशभर में स्वागत किया जा रहा है। सीबीआईसी के जिन 22 अधिकारियों को समय से पहले सेवानिवृत्त किया गया है उनमें 11 नागपुर और भोपाल क्षेत्र के हैं। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने इंदौर की एक कंपनी द्वारा गैर कानूनी तरीके से सिगरेट विनिर्माण को मंजूरी दी थी। इनके अलावा चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, मेरठ और चंडीगढ़ क्षेत्र के एक-एक और मुंबई, जयपुर और बेंगलुरु के दो-दो अधिकारियों को सेवानिवृत्त किया गया है।

सरकार के तमाम उपायों व कठोर कदमों के बावजूद भ्रष्टाचार को लेकर भारत के सरकारी क्षेत्र की छवि दुनिया की निगाह में अब भी खराब है। अंतरराष्टÑीय गैर सरकारी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ताजा रिपोर्ट ग्लोबल करप्शन इंडेक्स-2017 में देश को 81वें स्थान पर रखा गया है। भारत को इस सूचकांक में एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भ्रष्टाचार और प्रेस स्वतंत्रता के मामले में सबसे खराब स्थिति वाले देशों की श्रेणी में रखा गया है।

भ्रष्ट अधिकारियों को जबरन रिटायर करना भ्रष्टाचार पर मोदी सरकार का ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ जैसा प्रहार है। कदाचित इससे पहले हमने किसी भी प्रधानमंत्री को इतनी व्यापक और कड़ी कार्रवाई करते नहीं देखा। ये कोई एक दिन, महीना या साल भर के मामले नहीं है। हमारी व्यवस्था ऐसे ‘भ्रष्टों’ को ढोती आ रही थी। एक आयकर आयुक्त पर आय से ज्यादा संपत्ति के आरोप थे। उसे करीब 10 साल पहले निलंबित किया गया था और भ्रष्टाचार निरोधक कानून के तहत केस दर्ज किया गया था। केस आज भी जारी है। यह मामला ही स्पष्ट कर देता है कि भ्रष्टाचार से निपटने के कानून और हमारी व्यवस्था में कितने छिद्र हैं। बहरहाल भ्रष्टाचार पर अभी तो प्रक्रिया शुरू हुई है। न जाने कितने दागी और भ्रष्ट सरकारी अफसरों की नौकरी पर गाज गिरेगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम 2014 से ही मोदी सरकार का बुनियादी सरोकार रहा है। सचिव स्तर के अधिकारियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के साथ बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बिल्कुल स्पष्ट किया है कि भ्रष्टाचार किसी भी सूरत में किसी भी आधार और स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगा। अलबत्ता अधिकारी खुद को ही ‘पीएम’ समझें और आगामी पांच सालों का एजेंडा तैयार करें।

- राजेश माहेश्वरी
(ये लेखक के अपने विचार हैं)