Dainik Navajyoti Logo
Sunday 25th of August 2019
ओपिनियन

पेट्रोल एवं डीजल पर वैट

Wednesday, July 24, 2019 11:50 AM

किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को मंदी से निकालने के लिए राज्य में पेट्रोल एवं डीजल का उपभोग बढ़ना चाहिए। पेट्रोल एवं डीजल का उपभोग कैसे बढ़ेगा। जबकि समीपवर्ती जिलों में अन्य राज्यों की तुलना में पेट्रोल एवं डीजल का मूल्य अधिक होगा। राजस्थान को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात व मध्यप्रदेश राज्यों की सीमाओं में उपलब्ध दामों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में नया परिवर्धित बजट, 2019-20 प्रस्तुत किया गया। जिसमें मुख्यमंत्री ने बजट घोषणा की है कि कर प्रस्तावों में मेरे द्वारा कोई नया कर नहीं लगाया गया है तथा कर प्रस्तावों से लगभग 301 करोड़ रुपये की राहत प्रदान की है। लेकिन राज्य में बजट, 2019-20 से पूर्व ही 6 जुलाई, 2019 को पेट्रोल एवं डीजल पर वैट की दर को 4 प्रतिशत से बढ़ा दिया है। राज्य में पेट्रोल एवं डीजल की वैट दरें 28 प्रतिशत हो गई है जो कि समस्त उत्तरी भारत के राज्यों में सर्वाधिक मानी जाती है। प्रत्यक्षत: तो यदि पेट्रोल एवं डीजल की दरें बढ़ाई जाती है तो यह माना जाता है कि इससे राज्य सरकार का खजाना बढ़ जाएगा। लेकिन यह तो अधूरा सच है। वैट दरें बढ़ती है लेकिन राज्य में पेट्रोल एवं डीजल की खपत घट जाती है तो यह लाभ के स्थान पर घाटे का सौदा भी हो सकता है। राज्य के विधानसभा चुनाव से पूर्व भाजपा सरकार ने 4 प्रतिशत से पेट्रोल एवं डीजल पर देय राज्य वैट दरों को घटाया था लेकिन नई सरकार ने बढ़ा दिया है। पेट्रोल एवं डीजल पर जीएसटी लागू नहीं हुआ है। यद्यपि इस पर जीएसटी लगाए जाने की मांग तो की जाती है लेकिन राज्यों के मध्य परस्पर सहमति का अभाव है तथा केन्द्रीय सरकार के स्तर पर भी प्रबल इच्छाशक्ति की कमी है। यह मामला विचाराधीन है तथा सर्व सहमति को प्राप्त नहीं कर सका है।

राज्यों का यह तर्क है कि यदि पेट्रोल एवं डीजल पर जीएसटी लगाया जाएगा तो राज्य की वित्तीय स्वायत्तता खत्म हो जाएगी। पेट्रोल, डीजल, तम्बाकू एवं उत्पाद, शराब ऐसी मदें हैं जो कि राज्यों के लिए आवश्यकतानुसार कर आमदनी बढ़ाए जाने का जरिया है। यदि इन्हें जीएसटी के दायरे में लाया जाएगा तो सम्पूर्ण देश में एक ही जीएसटी दर लागू हो जाएगी। लेकिन राज्य सरकारों की वित्तीय स्वायत्तता गिर जाएगी। राज्य के परिवर्धित बजट, 2019-20 में राज्य वस्तु एवं सेवा कर से आय 29,000 करोड़ रुपये अनुमानित की गई है, जो कि जीएसटी का ही हिस्सा है। लेकिन बिक्री कर से आय 20 हजार करोड़ रुपये अनुमानित की गई है। जो कि राज्य की स्वयं की आमदनी है। यदि राज्य में 4 प्रतिशत वैट लगाया गया है तो राज्य की अर्थव्यवस्था एवं उपभोक्ता प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष दृष्टि से प्रभावित होगा। राजस्थान को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात, मध्यप्रदेश की सीमाओं में उपलब्ध पेट्रोल एवं डीजल के दामों से प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है। इससे इन राज्यों के समीपस्त जिलों में पेट्रोल एवं डीजल का उठाव प्रभावित होता है। नौबत यह भी आ जाती है कि पेट्रोल पंप बंद करने पड़ जाते हैं। समीपस्थ राज्यों में डीजल के दाम कम होने से माल वाहक ट्रक एवं यात्री वाहन राज्य में पेट्रोल एवं डीजल खरीदने के स्थान पर समीप राज्यों से ही खरीदना पसंद करते हैं जो कि राज्य को कर राजस्व का नुकसान है। लोकसभा के एक प्रश्न के जवाब में कहा गया है कि वर्ष 2018-19 में राज्य में भारत पेट्रोलियम की बिक्री 5.56 प्रतिशत, इण्डियन आॅयल की बिक्री 2.8 प्रतिशत तथा भारत पेट्रोलियम की बिक्री वर्ष 2017-18 की तुलना में घटी है जबकि उत्तर प्रदेश की 11 प्रतिशत बढ़ी है। जयपुर में डीजल के दाम 71.24 रुपये प्रति लीटर सर्वाधिक रहे हैं। जबकि जम्मू एवं कश्मीर में 70.4 रुपये प्रति लीटर लखनऊ में 65.62 रुपये तथा चण्डीगढ़ में 63.46 व गुरुग्र्राम में 65.81 रुपये प्रति लीटर रहे हैं।
सवाल यह है कि यदि राज्य में पेट्रोल डीजल के दाम सर्वाधिक होंगे तो राज्य का उपभोग कैसे बढ़ेगा। राज्य में 4 प्रतिशत अतिरिक्त वैट लगाकर मंदी से ग्र्रसित राज्य की अर्थव्यवस्था को मंदी के अंधेरे में ओर धकेल दिया है। किसी भी राज्य की अर्थव्यवस्था को मंदी से निकालने के लिए राज्य में पेट्रोल एवं डीजल का उपभोग बढ़ना चाहिए। पेट्रोल एवं डीजल का उपभोग कैसे बढ़ेगा। जबकि समीपवर्ती जिलों में अन्य राज्यों की तुलना में पेट्रोल एवं डीजल का मूल्य अधिक होगा।

राजस्थान को उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, गुजरात व मध्यप्रदेश राज्यों की सीमाओं में उपलब्ध दामों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है। होता यह है कि समीपस्त जिलों में पेट्रोल एवं डीजल का उठाव कम होता है तथा कृषि, औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियां कमजोर पड़ती है। तस्करी को बढ़ावा मिलता है, बेरोजगारी बढ़ती है तथा राज्य को वैट से आय भी कम मिलती है। राज्य की अर्थव्यवस्था को मंदी से उभारने के लिए पेट्रोल एवं डीजल पर वैट के प्रतिशत को कम एवं प्रतिस्पर्धात्मक बनाने की आवश्यकता है। सुदृढ़ कर नीति वही होती है जिसमें कर की दरें कम तथा प्रतिस्पर्धात्मक हो। यदि कर की दरें कम होती है तो कर राजस्व अधिक मिलेगा तथा कर चोरी की प्रवृत्ति पर अंकुश लगेगा। इसके अतिरिक्त राजस्थान वित्त विधेयक, 2019 के अन्तर्गत राजस्थान मूल्य परिवर्धित कर अधिनियम में संशोधन किया जा रहा है जिसके अन्तर्गत वर्तमान में पेट्रोल एवं डीजल पर वैट का उद्गृहण प्रथम बिन्दू के स्थान पर अंतिम बिन्दू जो कि उपभोक्ता द्वारा चुकाया जाता है, पर किया जाएगा। अभी तक तेल कम्पनियों द्वारा खुदरा डीलरों से वसूल की गई कीमत पर कर संदाय किया जाता है न कि उपभोक्ता द्वारा देय कीमत पर। इससे उपभोक्ताओं पर वैट का भार बढ़ेगा। प्रथम बिन्दू से लेकर अंतिम बिन्दू तक के मध्य मार्जिन, जो कि डीलर्स कमीशन एवं अन्य खर्चों पर भी वैट लग जाएगा। यह तो उपभोक्ताओं पर अप्रत्यक्ष तरीके से छिपा हुआ कर है जो कि विरोधाभासी है।

- डॉ. सुभाष गंगवाल
(ये लेखक के अपने विचार हैं)