Dainik Navajyoti Logo
Sunday 25th of August 2019
खास खबरें

पुराने घाट का कमनीय आकर्षण

Monday, August 12, 2019 12:25 PM
1945 का किशनपोल बाजार(फाइल फोटो)

जयपुर। 'स्केचेज ऑफ जयपुर' (1945) में अंग्रेजी लेखिका शकुंतला थाम्पी का वर्णन आगे चलता है- ‘तारों के प्रकाश, आग के उजाले और उसे घेरने वाले अंधकार से गलता का वातावरण कैसा हो जाता है, मैं वर्णन नहीं कर सकती। कुछ ऐसी रहस्य यहां भर जाता है, जिसकी कोई परिभाषा नहीं। यह सचमुच अलौकिक और अविस्मरणीय है। गलता की सुबह, गलता की शाम और सांझ के झुटपुटे के बाद गलता की रात की नीरवता। एक ओर शहर की हलचल और दूसरी ओर यहां अध्यात्म का निर्जन संसार। विरोधाभासों का कैसा रोचक अध्ययन यहां अपने आप को जाता है। गलता के रास्ते में पुराना घाट के आकर्षण से भी अभिभूत हुए बिना नहीं रहा जा सकता। इसके अतिरिक्त वर्णन से भी न कोई धोखा खा सकता है और न ही कोई निराश हो सकता है। विशाल भूरी और बैंगनी चट्टानें इस रमणीय स्थल के चारों ओर किसी मां की दुलार भरी भुजाओं की तरह फैली हैं। अपनी सामरिक अवस्थिति के कारण घाट ने पुराने समय में साहस और गर्व के आदर्शों को साकार होते देखा होगा। यहां आप पूरे सप्ताहभर रह लीजिए, तबीयत उबेगी नहीं। प्रतिदिन कोई ना कोई नई दिलचस्पी होती रहेगी। यहां बार-बार आने पर किसी पुराने सौंदर्य स्थल की ही खोज होगी। कल्पना कीजिए एक लम्बी और गहरी घाटी की, जिसके दोनों ओर मंदिर और उद्यान भवनों की पंक्तियां चली गई हैं। इन पर अधिकांश पर सौंठियां, नारंगी और गेरुआं रंग पुते हैं। आगे चलकर शानदार अ‍ैर उत्तुंग मछली दरवाजा है (सड़क के खतरनाक घुमाव पर स्थित होने के कारण इस दरवाजे को जिस पर कभी मछलियों के चित्र बने थे, संभवत: 1949 में गिराया गया था) जिसके नीचे होकर पत्थरों से जड़ा मार्ग जाता है और इस मार्ग के दोनों ओर कमनीय छतरियों, महलों, कृत्रिम जलाशयों वाले उद्यान, सीढ़ीदार बाग बगीचों की शृंखला मील भर तक चली गई। लगता है परियों का देश है, इस दृश्य के सामने वेनिस की अट्टालिकाएं भी फीकी पड़ जाती हैं।