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मूवी-मस्ती

महान संगीतकार खय्याम का निधन, फिल्म जगत में शोक की लहर

Tuesday, August 20, 2019 11:20 AM
खय्याम(फाइल फोटो)

मुंबई। बॉलीवुड के महान संगीतकार खय्याम का 93 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। खय्याम लंबे समय से बीमार चल रहे थे। फेफड़े में संक्रमण की वजह से उन्हें 28 जुलाई को मुंबई के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उन्होंने सोमवार को रात करीब साढ़े नौ बजे अंतिम सांस ली। चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार कार्डियक अरेस्ट के कारण उनका निधन हुआ। सोमवार शाम से ही उनकी हालत नाजुक थी और चिकित्सकों की एक टीम उनकी निगरानी कर रही थी।

मशहूर संगीतकार के निधन से फिल्म जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। बॉलीवुड के कलाकारों ने पद्म विभूषण से सम्मानित सर्वाधिक लोक प्रिय संगीतकार के निधन पर शोक व्यक्त किया है। उनका पूरा नाम मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी था, लेकिन फिल्म जगत में वह खय्याम के नाम से प्रसिद्ध थे। गजल गायक तलत अजीज, खय्याम और उनकी पत्नी जगजीत कौर का कठिन समय में ध्यान रख रहे थे। तलत अजीज ने कहा कि खय्याम साहब को कुछ समय तक के लिए अस्पताल में वेंटीलेटर पर रखा गया था। मुझे डॉक्टरों ने साढ़े नौ बजे बताया कि वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। उन्होंने कहा कि मैं अस्पताल में रोज सुबह उनके लिए कुरान पढ़ा करता था। खय्याम साहब चाहते थे कि मैं जीवन के अंतिम समय में पढ़े जाने वाले सूरह यासीन को पढूं, लेकिन मैंने उसे आज ही पढ़ा।

संगीतकार खय्याम ने फिल्म 'उमराव जान' में कमाल का संगीत दिया और उसके बाद से रेखा को 'उमराव जान' के रूप में प्रसिद्धि मिली। रेखा ने एक कार्यक्रम में कहा था कि ख्य्याम साबह ने मुझे रेखा से उमराव जान बना दिया। 'कभी-कभी' और 'उमराव जान' जैसी फिल्मों के लिए फिल्मफेयर अवॉर्ड पा चुके खय्याम ने अपने करियर की शुरुआत 1947 में की थी और फिल्म 'हीर रांझा' में संगीत दिया था, लेकिन मोहम्मद रफ़ी के गीत 'अकेले में वह घबराते तो होंगे' से उन्हें पहचान मिली। 'वो सुबह कभी तो आएगी', 'जाने क्या ढूंढती रहती हैं ये आंखें मुझमें', 'बुझा दिए हैं खुद अपने हाथों, 'ठहरिए होश में आ लूं', 'तुम अपना रंजो गम अपनी परेशानी मुझे दे दो', 'शामे गम की कसम', 'बहारों मेरा जीवन भी संवारों' जैसे अनेक गीत में अपने संगीत से चार चांद लगा चुके हैं। खय्याम की पत्नी जगजीत कौर भी अच्छी गायिका हैं और उन्होंने खय्याम के साथ 'बाजार', 'शगुन' और 'उमराव जान' में काम भी किया है। खय्याम साहब ने पिछले साल 14 मई को सिनेमा कामगारों की भलाई के लिए अपनी पूरी संपत्ति दान कर दी थी।