Dainik Navajyoti Logo
Monday 14th of October 2019
स्वास्थ्य

नारायणा हॉस्पिटल में दुर्लभ केस की जटिल सर्जरी, डॉक्टर्स ने बचाई बच्ची की जान

Thursday, October 03, 2019 13:00 PM
मासूम काश्वी की जटिल सर्जरी कर बचाई जान।

जयपुर। दो साल आठ महीने की काश्वी का शारीरिक विकास उसकी उम्र के बच्चों के बराबर नहीं था। मुश्किल से 9 किलो वजन था। वह दिल में छेद के साथ अत्यंत दुर्लभ जन्मजात विकार से पीड़ित थी, जिसमें हार्ट और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंग विपरीत दिशा में थे। इसके अलावा हार्ट में ब्लॉकेज थे, जो शरीर और फेफड़ों को रक्त की आपूर्ति को प्रभावित कर रहे थे। मामला बेहद जटिल व जोखिम भरा होने के कारण इसे जयपुर के नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कार्डियक साइंसेज टीम को भेजा गया, जिसने चुनौती स्वीकारी और बच्ची की सफलतापूर्वक सर्जरी की।

हरियाणा के छोटे से कस्बे से आई काश्वी की शारीरिक वृद्धि नहीं होने और बीमार रहने से माता-पिता चिंतित थे। वहां एक स्थानीय अस्पताल में प्रारंभिक जांच में बच्ची को डेक्सट्रोकार्डिया व साइटस इनवर्सस टोटलिस के साथ दिल के कई जटिल दोषों का पता चला। डेक्सट्रोकार्डिया के साथ साइटस इनवर्सस टोटलिस एक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात विसंगति है, जिसमें छाती और पेट के आंतरिक अंग विपरीत स्थिति में थे। मरीज की उम्र कम होने के अलावा हार्ट में छेद व ब्लॉकेज होने के कारण उसकी सर्जरी करना बेहद चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि शारीरिक बनावट असामान्य और बहुत जटिल थी।

इस जटिल व बहुत दुर्लभ केस की सर्जरी करने वाले कार्डियक सर्जरी के डायरेक्टर व एचओडी डॉ. सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि मरीज को कई ह्रदय दोष एक साथ थे, दिल में छेद, महाधमनी के नीचे ब्लॉकेज, जो शरीर में रक्त आपूर्ति को प्रभावित कर रहे थे। पल्मोनरी वाल्व स्टेनोसिस जो फेफड़ों में रक्त प्रभाव को बाधित कर रहा था। ये रुकावटें हार्ट पर बहुत अधिक दबाव डाल रही थीं, क्योंकि रक्त आपूर्ति के लिए हार्ट को बहुत पंपिंग करनी पड़ रही थी। इस कारण इन तमाम परेशानियों को सुधारने के लिए तुरंत सर्जरी जरूरी हो गई थी। क्योंकि शरीर का आंतरिक ढांचा व अंग रिवर्स स्थिति में थे, इसलिए सर्जरी करना तकनीकि रूप से और भी मुश्किल था। अनुभवी सर्जरी टीम और विशेषज्ञता के कारण बच्ची के सभी विकारों को सफलतापूर्वक ठीक कर दिया गया। इनमें कार्डियक एनेस्थीसिया व पीडियाट्रिक इन्टेंसिव केयर टीम का महत्वपूर्ण रोल था। सर्जरी के सात दिन बाद मरीज को छुट्टी दे दी गई। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। सर्जरी करने वाले विशेषज्ञ मरीज के जल्दी रिकवर करने और भविष्य में उसके अन्य बच्चों की तरह सामान्य जीवन जीने के प्रति आश्वस्त हैं। ऐसे मामलों में इलाज आमतौर पर दिल के दोषों को ठीक करने के उद्देश्य से किया जाता है, जो वजन कम बढ़ने, बार बार संक्रमण आदि जैसे लक्षणों का कारण बनते हैं। अंगों के विपरीत स्थिति में होने को ठीक करने के लिए सर्जरी की आमतौर पर जरूरत नहीं होती है, क्योंकि ये अंग अपने उलट स्थिति में भी प्रभावी ढंग से काम करते हैं।

8 अस्पतालों ने सर्जरी के लिए किया मना
बच्ची के दादा अरुण बीका ने बताया कि हम राजस्थान, हरियाणा और पंजाब के 8 अन्य अस्पतालों में बच्ची को दिखा चुके थे, सभी जगह रिस्की केस होने की कह कर मना करने से हम आशा खो चुके थे। एक जगह तो कहा गया कि अगर बच्ची का जीवन बचाने के लिए प्रयास भी करते हैं तो उसे जीवनभर बिस्तर पर ही रहना पड़ सकता है। यह नारायणा हॉस्पिटल की कार्डियक टीम थी, जिससे हमें उम्मीद थी कि हमारी बच्ची की जान बचाई जा सकती है और सर्जरी के बाद वह सामान्य जिंदगी जी सकती है। यह सबसे जटिल ह्रदय संबंधी विकार का इलाज कराने में हमारा विश्वास और जटिल हृदय मामलों का इलाज करने का अनुभव था, जिसने हमें नई आशा दी।