Dainik Navajyoti Logo
Sunday 21st of April 2019
ओपिनियन

वायु प्रदूषण पर रोकथाम आवश्यक

वायु प्रदूषण वर्तमान समय का सबसे ज्वलंत मुद्दा है। भारत की हवा में घुल चुका जहर इतना जानलेवा बन गया है कि प्रत्येक 30 सेकंड में एक भारतीय मृत्यु को प्राप्त हो रहा है।

20 Apr 10:25 AM

क्या देशद्रोह अपराध नहीं?

देश की आजादी के लिए भगत सिंह, चन्द्रशेखर आजाद, अशफाक उल्ला सहित लाखों लोगों ने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

20 Apr 10:15 AM

अब संतन को भी सीकरी सों काम!

राज्य-मंत्रणा के मंच पर आज ‘साधु-संतों’ को लेकर चर्चा चल रही थी। तभी एक विशेषज्ञ ने अष्टछाप वैष्णव कवि कुंभनदासजी के उस कवित्त की पंक्तियां सुनाईं

19 Apr 13:05 PM

प्रधानमंत्री मोदी की सफल विदेश नीति

17वीं लोकसभा के लिए चुनाव का दौर शुरू हो गया है। भारत में और भारत के बाहर भी मीडिया में इस बात की चर्चा हो रही है कि गत पांच वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विभिन्न क्षेत्रों में क्या उपलब्धि रही?

19 Apr 10:15 AM

महावीर युग फिर से आए

भगवान महावीर की जयन्ती मनाते हुए हमें महावीर बनने का संकल्प लेना होगा। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिए वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गए।

17 Apr 11:35 AM

बिना ‘बुलाक’ का बुलाकी!

आज बिना ‘बुलाक’ धारी बुलाकी की बात करते हैं। जो बीकानेर का वासी है। पिछले कुछ दिनों से राजधानी जयपुर की सड़कों पर उसके सड़कों के किनारे लगे बडे-बड़े पोस्टरों में फोटो साया हुए थे।

15 Apr 12:55 PM

जानिए, राजकाज में क्या है खास?

इन दिनों सवाई गुणा मदद को लेकर दोनों दलों में चिंतन-मंथन जोरों पर है। हो भी क्यों ना मामला मदद से ताल्लुकात रखता है और वो भी चुनावों में।

15 Apr 11:40 AM

कर्नाटक सरकार के भविष्य पर अनिश्चितता

कर्नाटक में लोकसभा चुनावों के नतीजे राज्य में कांग्रेस, जनता दल-स की लगभग एक साल पुरानी सरकार का भविष्य तय करेंगे।

15 Apr 11:30 AM

नोटा के लिए विकल्प की सार्थकता

हाल में देश के सर्वोच्च न्यायालय के सम्मुख एक याचिका प्रस्तुत की गई थी कि यदि ‘नोटा’ को, जीतने वाले प्रत्याशी से अधिक मत मिलें तो उस चुनाव को निरस्त कर देना चाहिए।

15 Apr 11:25 AM

निरंतर बढ़ती भाजपा की प्रासंगिकता

प्राय: इस देश के लोगों को वर्षों से राजनीतिक भ्रष्टाचार, दुराचार तथा अत्याचार झेलते रहने के कारण सब कुछ भूलने की आदत रही है। इस दुखांत त्रासदी में लोगों ने इतने वर्षों से भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी राष्ट्रीय राजनीति के कर्ताधर्ताओं से उनकी राजनीतिक गंदगी का हिसाब पूछना ही बंद कर दिया था।

12 Apr 10:00 AM