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गूगल को गुरू बनाकर राजस्थान के नितेश ने 'एप' की दुनिया में रचा इतिहास

Monday, May 08, 2017 11:45 AM
वर्तमान में मैं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सॉफ्टवेयर पर काम कर रहा हूं। जिसे हम फेसबुक मैसेंजर में इनबिल्ट करेंगे। इस एप से जो भी व्यक्ति फेसबुक चलाता है वह फेसबुक चलाते-चलाते ही पढ़ाई कर सकेगा

नीमराना। राजस्थान के अलवर जिले के कान्हड़का गांव के रहने वाले होनहार युवा एप डवलपर नितेश यादव 11वीं कक्षा में बीबीरानी स्थित द्रोणाचार्य उच्च माध्यमिक विद्यालय में अध्ययनरत हैं। नितेश की हॉबी एप और वेबसाइट बनाना है, उन्होंने अब तक बुहत सारे एप और 14 से ज्यादा वेबसाइट तैयार की हैं।

नितेश का कान्हड़का गांव कोटकासिम के पास है। दैनिक नवज्योति से खास बातचीत में नितेश ने एप सीखने से लेकर  बनाने तक विस्तार से बात की-



सवाल- नितेश, जिस उम्र में बच्चे क्रिकेट खेलते हैं वीडियो गेम खेलते हैं उस उम्र में तुम्हें एप बनाने की क्या सूझी ?
जवाब-  पहले मैं भी क्रिकेट खेलता था, वीडियो गेम खेलता था लेकिन जब मैं नवीं कक्षा में था तब उस समय मैंने एक दिन अलवर के इमरान खान के बारे में अखबार में पढा तब मैंने सोचा कि एप क्या होते हैं और कैसे काम करते हैं। लेकिन उस समय मेरे पास ना तो स्मार्टफोन था और ना ही कोई कंप्यूटर जिससे कि मैं ये एप बारे में जान सकता। संसाधनों के अभाव में उस समय मैंने एप शब्द को भुला दिया लेकिन दिसंबर 2015 में जब माननीय प्रधानमंत्री ने लंदन के वेंबले स्टेडियम से इमरान खान का नाम लिया तो फिर से वह एक शब्द मेरे दिमाग में घूमने लगा। तब मैंने निश्चय किया कि अब मैं भी एप बनाना सीखूंगा। लेकिन क्योंकि मैं ग्राम्य अंचल से था,  तो आस-पास कोई प्रोग्रामर न होने के कारण मेरे लिए एप की कोडिंग सीखना एक चुनौती थी तब मैंने गूगल को चुना। फिर मैंने गूगल को अपना गुरु मान लिया और गूगल से ही मुझे एप बनाने के बारे में जानकारी मिली।


सवाल- जब आप एप बनाना सीख रहे थे, तो उस समय परिवार की क्या प्रतिक्रिया थी और आपके माता पिता ने इसमें क्या सहायता की ?
जवाब-  जब मैं गूगल से एप बनाना सीख रहा था तब मुझे तो पता था कि मैं क्या कर रहा हूं। लेकिन परिवार वालों को नहीं, वह हमेशा मुझे सीखने से दूर करते और पढ़ाई पर ध्यान लगाने को कहते। लेकिन तब भी मैं छुप-छुपकर एप की कोडिंग सीखता क्योंकि मैं भी एक एप डवलपर बनना चाहता था। पापा ने बाद में मेरे जुनून को समझा और मुझे एक स्मार्टफोन लाकर दिया। उस स्मार्टफोन ने मेरी तकदीर बदल दी और आज मैं जो कुछ भी हूं उसका श्रेय मैं अपने गूगल गुरू के साथ साथ अपने माता पिता को देना चाहता हूं।

सवाल- आपने अब तक जो जो एप बनाए हैं, उनके बारे में बताइए?
जवाब- गूगल से कोडिंग सीखने के बाद मैंने पहला एप अपने गांव कान्हड़का को डिजिटल इंडिया से जोड़ने के लिए बनाया। जिसमें गांव की समस्त जानकारियों को डिजिटल रूप में संचित किया है। "मेरा कान्हड़का" नामक इस एप को मैंने 10 अगस्त 2016 को लांच किया। इस एप से मुझे जो लोगों का प्यार और आशीर्वाद मिला। उस आशीर्वाद ने मुझे दूसरी एप बनाने के लिए प्रेरित किया। माननीय उपखण्ड अधिकारी बलवंत सिंह लिग्रि से परामर्श के बाद मैंने किसानों को डिजिटल इंडिया से जोड़ने के लिए किसान गुरु ऐप लॉन्च किया। इस ऐप में कृषि फसलों को बोने की विधि, खाद बीज, दवाएं, कृषि योजनाएं आदि का डिजिटल विवरण उपलब्ध कराया है। इस एप को लोगों का जबरदस्त समर्थन मिला और अब तक 40000 से भी ज्यादा लोग इस एप को डाउनलोड कर चुके हैं। इसके अलावा हमने शिक्षा को डिजिटल शिक्षा में परिवर्तित करने के लिए भी एप बनाए।


सवाल- वर्तमान में आप किस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं ?
जवाब- वर्तमान में मैं आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस सॉफ्टवेयर पर काम कर रहा हूं। जिसे हम फेसबुक मैसेंजर में इनबिल्ट करेंगे। इस एप से जो भी व्यक्ति फेसबुक चलाता है वह फेसबुक चलाते-चलाते ही पढ़ाई कर सकेगा। इस सॉफ्टवेयर का नाम "एग्जाम मित्र" रखा है। इससे आप जो भी प्रश्न पूछेंगे यही तुरंत आपको उसका उत्तर देगा व इससे आप प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी फेसबुक चलाते चलाते ही कर सकेंगे। यह एग्जाम मित्र बनाने का आइडिया मुझे तब आया जब मेरे और मेरे दोस्तों के घर वाले जब भी हम फेसबुक चलाते थे तो हमेशा फेसबुक से दूर रहने और पढ़ने की सलाह देते थे। तो उस दिन मैंने सोचा कि मैं एक ऐसा सॉफ्टवेयर बनाऊंगा जिससे फेसबुक पढ़ने का आधार बनेगा और मैंने उसी पर काम शुरु किया और 2 महीने की मेहनत के बाद जो परिणाम सामने आया था। वह था "एग्जाम मित्र"।

सवाल- आप जो ये काम काम कर रहे हैं, उसके लिए किसी कंपनी या सम्मेलन से निमंत्रण मिला ?
जवाब- जी हां, जब से मैंने एप और वेबसाइट के क्षेत्र में काम करना शुरू किया तभी से बहुत सी कंपनियों से मुझे निमंत्रण मिले। सबसे पहले गूगल नॉर्थ हेड ऑफिस से मुझे निमंत्रण मिला। वहां गूगल के ऑफिस में मुझे बुलाया गया और वहां मैंने गूगल के काम करने की क्रिया विधि को जाना। वहां मैं बहुत से गूगल कर्मचारियों से मिला और मुझे बहुत कुछ सीखने को मिला। इसके अलावा नैसकॉम मुंबई, प्रोग्रामिंग हब, गूगल बेंगलुरु और मोज़िला चेन्नई आदि कंपनियों से इनविटेशन मिले। इसके अलावा हाल ही में जून में अमेरिका में होने वाले नेक्स्ट जनरेशन समिट में शिरकत करने के लिए भी निमंत्रण आया है। इसके अलावा अब तक अनेक जगहों पर सम्मान हो चुका है व राजस्थान के शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी ने भी मुझे इन कार्यों के लिए शुभकामनाएं दी हैं।

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