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Tuesday 25th of June 2019
ब्लॉगर मंच

बाल विवाह और दहेज जैसी कुप्रथाओं का करें बहिष्कार

Ankit bankawat

भारतीय समाज में प्राचीनकाल से चली रहीं बाल विवाह व दहेज जैसी कुप्रथाएं आज भी बरकरार हैं। कहने को तो कुप्रथाएं हैं, लेकिन समाज में काफी इन्हें प्रथाएं मानते हैं।

दहेज के चलते आज समाज में महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं, दहेज को लेकर महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है। आए दिन समाचार पत्रों में दहेज को लेकर महिलाओं के साथ अत्याचार व बदसलूकी की खबरें देखने को मिलती हैं।

कई बार तो महिलाओं पर होने वाले अत्याचार की सीमा इतनी बढ़ जाती है कि महिला की मृत्यु भी हो जाती है। कई बार महिलाएं इन अत्याचारों से परेशान होकर सुसाइड जैसा कदम उठा लेती हैं। दहेज के खिलाफ सरकार ने कानून भी बना रखा है, लेकिन इसे सही तरीके से लागू करने की आवश्यकता है।

इसके अलावा बाल विवाह भी हमारे समाज की एक बड़ी समस्या है। खेलने-पढ़ने की उम्र में बच्चों का विवाह कर दिया जाता है। उस समय वो पूर्ण रूप से शारीरिक व मानसिक तौर पर मजबूत भी नहीं होते हैं, बावजूद उनकी बिना इच्छा के उनका विवाह कर दिया जाता है, जिसके दुष्परिणाम उन्हें जिंदगीभर भुगतने पड़ते हैं।

बाल विवाह को रोकने के लिए भी सरकार ने कानून भी बना रखा है, जिसके लिए विवाह की उम्र भी सीमित कर रखी है। बालक की उम्र 21 व बालिका की 18 वर्ष निधारित कर रखी है।

इसके बाद भी कानून की अनदेखी कर लोग आज भी इस कुप्रथा को अपनाए हुए हैं। बाल विवाह के मामले ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में सामने आते हैं। यहां ऐसा होने के कारण लोगों का कम शिक्षित होना है। बाल विवाह व दहेज जैली कुप्रथाओं को रोकने के लिए हमें समाज के लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।

सरकार की तरफ से दहेज और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं को रोकने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं। वहीं सामाजिक स्तर पर कई लड़कों ने अपनी शादियों में दहेज ना लेकर बेहतरीन उदाहरण पेश किए हैं।

कई शादियों में लड़कों ने दहेज में रुपये ना लेकर तुलसी के पौधे या छायादार वृक्ष लेकर पूरे पूरे गांव में लगवाकर पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश दिया है। कहने का मतलब ये है कि इन कुप्रथाओं को समाप्त करने के लिए लोगों का शिक्षित होना बहुत जरूरी है। शिक्षित समाज ही दहेज और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर अंकुश लगा सकता है। इसके लिए लोगों को शिक्षा के लिए जागरुक करना होगा और गांव-ढाणियों में भी लोगों को जागरूक करना होगा।